दिल्ली सरकार यमुना नदी को साफ करने की तैयारी में है। 36.23 करोड़ रुपये के बजट से आईआईटी तकनीक का उपयोग होगा। यह तरीका वाराणसी में गंगा की सफाई में सफल रहा है। ‘क्लियर बोट’ एआई नाव कचरा हटाएगी। स्मार्ट प्रयोगशालाएं और डीएसएस से नदी की रियल टाइम निगरानी होगी।

सरकार ने बनाया ये प्लान
सरकार ने ‘अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान’ बनाया है। इस प्लान के तहत यमुना को साफ किया जाएगा। 36.23 करोड़ रुपये का बजट इसी काम के लिए है। इस पैसे से नदी को साफ करने के लिए IIT की तकनीक का इस्तेमाल होगा। यह तरीका वाराणसी में गंगा की सफाई में सफल रहा है।
इन दोनों की मदद से होगा खास काम
यमुना को साफ करने के लिए कई नए काम होंगे। इसमें स्मार्ट प्रयोगशालाएं बनाई जाएंगी। एक ‘डिसीजन सपोर्ट सिस्टम’ (DSS) भी तैयार होगा। ‘ क्लियर बोट ‘ नाम की एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक भी बनेगी। जल बोर्ड के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। इस काम में IIT दिल्ली और नीदरलैंड की तकनीक मदद करेगी।
क्या है ‘क्लियर बोट’
‘क्लियर बोट’ एक AI से चलने वाली मानवरहित नाव है। यह नाव वाराणसी में गंगा नदी को साफ करने के लिए इस्तेमाल हुई थी। यह नाव पानी में तैरते कचरे को पहचानती है। जैसे फूल-माला और प्लास्टिक को यह साफ करती है। यह तकनीक यमुना में भी कचरा हटाने में मदद करेगी।
वाराणसी में भी है ऐसी प्रयोगशाला
वाराणसी में एक स्मार्ट प्रयोगशाला भी है। इसे डेनमार्क के सहयोग से बनाया गया है। यह प्रयोगशाला गंगा और वरुणा नदी की सफाई पर नजर रखती है। यह पानी के मैनेजमेंट में भी मदद करती है। दिल्ली में भी ऐसी ही प्रयोगशालाएं बनेंगी।
यमुना की होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग
‘DSS’ से यमुना नदी के पानी की रियल टाइम मॉनिटरिंग होगी। इसका मतलब है कि पानी की गुणवत्ता पर तुरंत नजर रखी जाएगी। यह डेटा दिखाएगा और पानी की स्थिति का अनुमान लगाएगा। इससे नदी के पानी को साफ रखने में बहुत मदद मिलेगी। पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए ‘हाइड्रो-जियोलॉजिकल मॉडल’ का भी इस्तेमाल होगा। यह मॉडल पानी की बेहतर जांच करेगा।
