बेटी लतिका ने मां शीला दीक्षित को ऐसे किया याद
लतिका दीक्षित ने आगे कहा कि यह दुख का अवसर नहीं है। हम खुद को धन्य मानते हैं कि दिल्ली ने उन्हें शहर को बदलने के लिए 15 साल दिए और उन्होंने अपार प्रेम, समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ इसकी सेवा की। वह आज भी दिल्ली के लोगों के दिलों में जीवित हैं, जिससे मुझे बहुत खुशी और सुकून मिलता है। मेरे लिए इससे बड़ी कोई खुशी नहीं है कि अम्मा आज भी लोगों की यादों और दिलों में जीवित हैं। इससे बड़ी चीज मेरे लिए क्या हो सकती है।
‘मां दिल्ली के बारे में जानकारी जुटाती थीं’
लतिका दीक्षित ने मां शीला दीक्षित के कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि वह अक्सर पूछती थीं कि लोगों को क्या-क्या मुश्किलें आ रही हैं। उनका घर सभी के लिए खुला था। वह सिर्फ अधिकारियों या अपने खुद के अवलोकन से नहीं, बल्कि हर जगह से दिल्ली के बारे में जानकारी जुटाती थीं। वह हर किसी से पूछती थीं, ‘दिल्ली में क्या हो रहा है? क्या कमियां हैं? मुझे बताओ, हम कैसे सुधार कर सकते हैं?’
सबकी सुनती थीं… फैसले खुद लेती थीं- लतिका
लतिका ने बताया कि अम्मा (शीला दीक्षित) हमेशा सभी से सलाह लेती थीं। मुझे लगता है कि यह उनकी सबसे बड़ी खूबी थी कि वह सबकी सुनती थीं। बेशक, वह अपने फैसले खुद लेती थीं, लेकिन वह हमेशा लोगों की बात सुनती थीं। क्योंकि मैं एनजीओ के क्षेत्र में थी, तो हम कई मुद्दों को लेकर चर्चा करते थे।
संदीप दीक्षित ने मां को लेकर क्या कहा जानिए
शीला दीक्षित की जयंती पर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा कि इस दिन, कई कांग्रेस कार्यकर्ता, नेता और दिल्ली के लोग उन्हें याद करते हैं और श्रद्धांजलि देते हैं। उनके निधन के 11-12 साल बाद भी, दिल्ली में अभी भी चर्चा होती है कि अगर किसी ने सही मायने में शहर का विकास किया, तो वह शीला दीक्षित के कार्यकाल में हुआ। वह सिर्फ हमारे परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दिल्ली के लिए एक मां की तरह थीं। दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद भी कई बीजेपी नेता मुझसे मिले थे। उन्होंने कहा था कि हमने भी उनके कार्यों का प्रचार के दौरान इस्तेमाल किया।