दिल्ली की एक कोर्ट ने आप प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल को कथित शराब नीति घोटाले के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय के समन का पालन न करने से जुड़े दो मामलों में बरी कर दिया।

ईडी ने क्यों फाइल किया था केस?
ईडी की तरफ से यह केस इसलिए फाइल किया था कि केजरीवाल ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 50 के तहत एजेंसी द्वारा जारी समन का पालन नहीं किया था। कथित घोटाले की जांच के सिलसिले में अलग-अलग तारीखों पर पांच समन जारी होने के बावजूद केजरीवाल केंद्रीय एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए थे।सीएम केजरीवाल ने 2023 में 02 नवंबर और 21 दिसंबर, और 2024 में 03 जनवरी और 18 जनवरी को जारी किए गए ED के समन को छोड़ दिया था। उन्होंने इन समन नोटिस को ‘अवैध’ बताया था। मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की ED की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा 17 अगस्त, 2022 को दर्ज एक मामले से जुड़ी है, जो 2021-22 की दिल्ली एक्साइज पॉलिसी में कथित अनियमितताओं से संबंधित है।
एलजी सक्सेना की शिकायत पर CBI केस
CBI ने यह केस 20 जुलाई, 2022 को लेफ्टिनेंट गवर्नर वीके सक्सेना की शिकायत पर दर्ज किया था। इसके बाद ED ने 22 अगस्त, 2022 को आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से एक केस दर्ज किया। दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बाद में मुख्य केस में गिरफ्तार किया गया और आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी।
ED ने आरोप लगाया था कि एक्साइज पॉलिसी कुछ प्राइवेट कंपनियों को 12 परसेंट का होलसेल बिजनेस प्रॉफिट देने की साज़िश के तहत लागू की गई थी, जबकि ग्रुप ऑफ़ मिनिस्टर्स (GoM) की मीटिंग के मिनट्स में ऐसी कोई शर्त नहीं बताई गई थी।
