दिल्ली के फर्श बाजार थाने में तैनात एक सब इंस्पेक्टर पर रिश्वत मांगने और आरोपियों को बेल दिलवाने का आरोप लगा है। वकील संदीप चौधरी ने आरोप लगाया है कि एसआई ने उनसे 50 हजार रुपये की मांग की और पैसे न देने पर आरोपियों का साथ देने की धमकी दी।

यही नहीं कोर्ट में एसआई ने यह तक कह दिया कि उन्हें आरोपियों को अरेस्ट करने की जरूरत नहीं। ना ही कोई रिकवरी करनी है, जबकि वारदात में इस्तेमाल पिस्टल, चोरी हुई चेन बरामद करनी बाकी थी। यही नहीं पुलिसकर्मी ने कोर्ट में यह तक कहा कि मामले में आरोपियों पर लगी सभी धाराएं जमानती हैं, जबकि उसमें एक धारा जमानती है। जिले के आला अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच करवाई जा रही है।
बेल के बाद घर आ धमके आरोपी
जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता संदीप चौधरी विश्वास नगर इलाके में रहते हैं। वह पेशे से वकील हैं। बीती 14 अगस्त को गली में रहने वाले दबंगों ने उनके घर व परिवारवालों पर हमला कर दिया था। पिस्टल की बट मारकर उनके पिता की नाक तोड़ दी थी। साथ ही उनकी डेढ़ तोले की सोने की चेन तोड़ ली थी और ढाई हजार रुपये भी निकाल लिए थे। इस मामले में अगले दिन केस दर्ज हुआ था।
चौधरी का आरोप है कि 18 अगस्त को एसआई जेपी शर्मा उन्हें कड़कड़डूमा कोर्ट में मिले थे, जहां उन्होंने उनसे 50 हजार रुपये की डिमांड की थी। 26 अगस्त की शाम सभी आरोपी एक बार फिर पीड़ित परिवार को धमकाने आ गए। वे बोले- देख ले, पैसों में कितनी ताकत है। हमने आईओ को खरीद लिया है और उन्होंने तुम्हारी वकीलों की कोर्ट हड़ताल में भी हमारी बेल करवा दी है। अब भी तुमने केस वापस नहीं लिया तो एसआई रिटायरमेंट से पहले इस केस की कैंसिलेशन फाइल कर देगा।
कोर्ट में आईओ ने दिया गलत जवाब
आरोप है कि इस केस में एसआई ने कोर्ट के अंदर जो रिप्लाई फाइल किया वो एसएचओ से फॉरवर्ड नहीं है, यानि एसएचओ को जवाब दिखाए बिना सीधे कोर्ट में पेश कर दिया, जो नियम के अनुसार गलत है। यही नहीं रिकवरी करे बिना कोर्ट में रिकवरी ना करने वाली वाली बात कह दी। साथ ही केस में लगी सभी धाराओं को जमानती बता दिया, जबकि बीएनएस की धारा 303 (2) गैर जमानती धारा है।