जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) छात्र संघ चुनावों में लेफ्ट यूनिटी ने सभी चार प्रमुख पदों पर जीत हासिल की है। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव पदों पर लेफ्ट यूनिटी का कब्जा हुआ है, जो JNU में वामपंथी विचारधारा के दबदबे को दर्शाता है।

- लेफ्ट यूनिटी की जीत का अंतर काफी महत्वपूर्ण रहा। अध्यक्ष पद के लिए लेफ्ट यूनिटी की उम्मीदवार अदिति मिश्रा ने 1,861 वोट हासिल किए। उन्होंने एबीवीपी के विकास पटेल को हराया, जिन्हें 1,447 वोट मिले।
- उपाध्यक्ष पद पर के. गोपिका ने 2,966 वोटों से बड़ी जीत दर्ज की। उन्होंने एबीवीपी की तान्या कुमारी को पीछे छोड़ा, जिन्हें 1,730 वोट मिले।
- महासचिव पद पर सुनील यादव (लेफ्ट) ने एबीवीपी के राजेश्वर कांत दुबे को हराया।
- संयुक्त सचिव पद पर, दानिश अली ने 1,991 वोट प्राप्त कर लेफ्ट यूनिटी की क्लीन स्वीप पूरी की। उन्होंने एबीवीपी के अनुज दमारा को हराया, जिन्हें 1,762 वोट मिले।
रात भर जश्न का माहौल रहा, दिल्ली के आसमान के नीचे लाल झंडे लहराते रहे। यह साफ हो गया कि JNU में लेफ्ट का दबदबा सिर्फ इतिहास नहीं है, बल्कि यह लगातार विकसित हो रहा है, बदल रहा है और प्रेरित कर रहा है। 2025 का यह फैसला सिर्फ यह नहीं बताता कि छात्र संघ का नेतृत्व कौन करेगा, बल्कि यह भी बताता है कि JNU भारत की अकादमिक और राजनीतिक चेतना की बड़ी कहानी में क्या प्रतीक है। अंत में, JNUSU चुनावों ने एक जानी-पहचानी सच्चाई को फिर से साबित किया है कि JNU में राजनीति सिर्फ वोट तक सीमित नहीं है। यह हर बहस में, हर नारे में और हर उस छात्र में जीवित है जो सवाल पूछने की हिम्मत करता है।
