ड्राफ्ट मास्टर प्लान-2041 अपने समय से 4 साल लेट हो चुका है। इस मास्टर प्लान को बनाने की प्रक्रिया 2017 के अंत में शुरू हुई थी। 6 साल बाद भी यह नोटिफाई नहीं हो सका है। सूत्रों के अनुसार मंत्रालय अपने स्तर में इस ड्राफ्ट में कई बदलाव कर चुका है। ड्राफ्ट में कुछ आपत्तियां केंद्र और कुछ सेंट्रल से भी जताई गई हैं।

सूत्रों के अनुसार मंत्रालय अपने स्तर में इस ड्राफ्ट में कई बदलाव कर चुका है। ड्राफ्ट में कुछ आपत्तियां केंद्र और कुछ सेंट्रल से भी जताई गई है। इसके लागू होने से इन सीटू झुग्गी पुनर्वास, अनधिकृत कॉलोनियों के पुनर्विकास, विस्तार के लिए जमीन का आवंटन, नई आवासीय योजना, यमुना के डूब क्षेत्र का संरक्षण और औद्योगिक विकास जैसी बड़ी परियोजनाएं शुरू होंगी।
क्या आ रही है अड़चनें
एक अधिकारी ने बताया कि इस ड्राफ्ट में केंद्र और राज्य दोनों की तरफ से कई आपत्तियां हैं। यमुना को लेकर भी कई आपत्तियां उठी हैं। यमुना किनारे 100 अनधिकृत कॉलोनियां बसी हुई हैं। इन्हें लेकर भी मतभेद है। एनजीटी में डीडीए की तरफ से दी गई रिपोर्ट में यमुना के बाढ़ क्षेत्र में हो रहे अनधिकृत निर्माण की वजह से 2023 में आई बाढ़ पर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यमुना बाढ़ क्षेत्र के डिमार्केशन के दौरान तकनीकी विसंगतियां सामने आई। डीडीए ने यमुना बाढ़ क्षेत्र का सर्वे किया था। इस सर्वे में सैटेलाइट इमेजिंग और ड्रोन फोटोग्राफ का इस्तेमाल किया गया था। इसमें पाया गया कि यमुना के बाढ़ क्षेत्र की 7,362 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जा है।
आगे क्या विकल्प?
एक्सपर्ट का मानना है कि जिस तरह से एमपीडी-2021 में अब तक कई जरूरी संशोधन हो चुके हैं, ऐसे में इस बात की भी संभावना है कि सरकार एक नोटिफिकेशन जारी करके यह घोषित कर दें कि अब मास्टर प्लान-2021 को ही मास्टर प्लान-2041 माना जाएगा, क्योंकि नए प्लान के ड्राफ्ट पर अब तक कई मतभेद कायम है। इसे लेकर गृह मंत्रालय और पीएमओ तक में कई बार बैठकें हो चुकी हैं।
