रात के अंधेरे में दिल्ली के चड़ियाघर से कई सियार बाड़े से निकलकर अजीमगंज सराय के जंगल की ओर भाग गए। इस घटना को चिड़ियाघर प्रबंधन की बड़ी लापरवाही माना जा रहा है।

हिरणों को तो स्टाफ ने कुछ घंटों बाद पकड़ लिया था लेकिन भागे हुए सभी सियारों को अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है। प्रशासन ने दोनों घटनाओं को छिपाने की कोशिश की। हिरणों के मामले में प्रशासन सफल भी रहा लेकिन सियारों की घटना मीडिया में आने के बाद भी चिड़ियाघर की ओर से संतोषजनक जानकारी नहीं दी जा रही है। रविवार शाम 4 बजे के बाद चिड़ियाघर के डायरेक्टर डॉ. संजीत कुमार ने माना कि सियार बाड़े से जंगल की ओर भागे हैं, लेकिन उन्होंने सियारों की संख्या, भागने का समय और वो बाहर कैसे आए जैसे सवालों के जवाब नहीं दिए।
कई जगह से टूटी हुई है जाली
चिड़ियाघर के बयान में सियारों की संख्या 3 या 4 बताई जा रही है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि उनमें से एक को पकड़ लिया गया है। बाकियों की तलाश जारी है। चिड़ियाघर प्रशासन से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि बाड़े की बाउंड्री मोटी लोहे की जालियों से बनी है लेकिन अजीमगंज सराय की ओर लगी जाली लंबे समय से कई जगह से टूटी हुई है। सियार इसी रास्ते से बाहर निकले हो सकते हैं।
सीसीटीवी निगरानी नाका
चिड़ियाघर में 400 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। रात में कंट्रोल रूम में 5 कर्मचारी मौजूद रहते हैं, फिर भी सियारों के बाहर आने की जानकारी समय पर नहीं मिली।
सुरक्षा स्टाफ की कमी से बढ़ी दिक्कत
करीब 200 एकड़ में फैले चिड़ियाघर की दो रेंजों में 20 बीट हैं और वन्यजीव 75 से ज्यादा बाड़ों में रहते है। 1 साल पहले तक यहां 120 से अधिक DPL और स्थाई कर्मचारी तैनात थे लेकिन अब उनकी संख्या घटाकर 85 कर दी गई है। कर्मचारियों की कमी का असर निगरानी पर साफ दिख रहा है और लगातार जानवर बाड़ों से बाहर निकल रहे है। डायरेक्टर डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि भागे हुए सियारों को पकड़ने के लिए पशु विभाग, सुरक्षा स्टाफ व कैप्चर टीमें तैनात कर दी गई है।

