दिल्ली दंगा मामले में एक्टिविस्ट उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था।

दिल्ली हाई कोर्ट ने 2 सितंबर को खालिद और शरजील इमाम सहित नौ लोगों को जमानत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा कि नागरिक प्रदर्शनों या विरोध की आड़ में साजिश के तौर पर हिंसा की इजाजत नहीं दी जा सकती। हाई कोर्ट ने इस मामले में खालिद, इमाम, मोहम्मद सलीम खान, शिफा-उर-रहमान, अतर खान, मीरान हैदर, अब्दुल खालिद सैफी, गुलफिशा फातिमा और शादाब अहमद की जमानत खारिज कर दी थी। एक अन्य आरोपी तस्लीम अहमद की जमानत याचिका 2 सितंबर को ही हाईकोर्ट की दूसरी पीठ ने खारिज कर दी थी। पिछले हफ्ते, इमाम और गुलफिशा फातिमा ने भी हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
हाई कोर्ट ने आरोपियों को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि संविधान नागरिकों को विरोध प्रदर्शन करने और धरना देने का अधिकार देता है, बशर्ते वे व्यवस्थित, शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के हों, और ऐसे कदम कानून की सीमाओं के भीतर होने चाहिए। हालांकि हाई कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक बैठकों में शांति से विरोध प्रदर्शनों में शामिल होना और भाषण देना अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत संरक्षित है और इसे पूरी तरह से दबाया नहीं जा सकता, लेकिन अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अधिकार “पूर्ण नहीं” है और “उचित प्रतिबंधों” के अधीन है। जमानत खारिज करने वाले आदेश में कहा गया था कि अगर बिना किसी सीमा के विरोध करने के अधिकार की अनुमति दी जाती, तो यह संवैधानिक ढांचे को नुकसान पहुंचाता और देश की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर असर डालता।
खालिद, इमाम और अन्य आरोपियों पर UAPA और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है। उन पर फरवरी 2020 के दंगों के “मास्टरमाइंड” होने का आरोप है, जिनमें 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक घायल हुए थे। ये हिंसक घटनाएं नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों के दौरान भड़की थीं। सभी आरोपियों ने लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। वे 2020 से जेल में बंद हैं और ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया था। अब इस मामले में उमर समेत तीन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
