दिल्ली में पानी का संकट गहरा रहा है क्योंकि शहर की आधी से ज़्यादा पाइपलाइन 20 साल से पुरानी हो चुकी हैं। इस वजह से 55% तक पानी बर्बाद हो रहा है और उपभोक्ताओं तक गंदा पानी पहुँच रहा है। सरकार ने नई परियोजनाएं शुरू की हैं, लेकिन समस्या पुरानी व्यवस्था की देन है।

शुक्रवार को विधानसभा में दिल्ली सरकार के जल मंत्री परवेश शर्मा ने बताया कि दिल्ली की आधी से ज्यादा पानी की पाइपलाइन अपनी उम्र पार कर चुकी हैं। 5,200 किलोमीटर से ज्यादा पाइपलाइन, यानी कुल का 32.5%, 30 साल से भी पुरानी है। वहीं, 2,700 किलोमीटर, यानी करीब 17% पाइपलाइन 20 से 30 साल पुरानी है।
दिल्ली का 55% पानी बर्बाद
दिल्ली की इस पुरानी पाइपलाइन व्यवस्था के कारण 55% तक पानी बर्बाद हो जाता है। जिसके कारण आधे से ज्यादा साफ किया हुआ पानी उपभोक्ताओं तक पहुंच ही नहीं पाता। एक अधिकारी ने कहा, “जब पाइपलाइन 30 साल पुरानी हो जाती है, तो पानी नहीं, समस्याएं बहती हैं।” उन्होंने इस बर्बादी को लंबे समय से उपेक्षा का नतीजा बताया।
बीजेपी विधायक सतीश उपाध्याय के सवालों और मांगों का जवाब देते हुए वर्मा ने कहा कि पिछले 11 महीनों में दिल्ली सरकार ने 7,212 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू की हैं। उन्होंने कहा, ‘दिल्ली सरकार केंद्र सरकार के साथ मिलकर हर घर में पीने का पानी पहुंचाने के लिए काम कर रही है। लेकिन आज हम जिस समस्या का सामना कर रहे हैं, वह पिछली आम आदमी सरकार की वजह से है। हमने जल और सीवर क्षेत्र में 94 परियोजनाएं शुरू की हैं।’
मध्य दिल्ली इंदौर बनने का राह पर?
वहीं उत्तर, मध्य और दक्षिण दिल्ली के कई इलाकों जैसे मॉडल टाउन, वसंत कुंज, करोल बाग, आजाद मार्केट के रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने बदबूदार और गंदे पानी की शिकायत की है। लोग पाइप से आने वाले पानी का इस्तेमाल करने से डर रहे हैं। पानी की सप्लाई भी अनियमित है। RWA के अध्यक्ष अतुल गोयल ने कहा है कि मध्य दिल्ली एक और इंदौर बनने की कगार पर है।
