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दिल्ली में रैन बसेरों की संख्या बढ़ी, सर्दी के मौसम में बेघर लोगों को रेखा गुप्ता सरकार ने दी बड़ी राहत – Delhi News Daily

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Last updated: January 16, 2026 12:42 am
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दिल्ली के रैन बसेरों में सिर्फ रहने की जगह ही नहीं, बल्कि भोजन और साफ-सफाई का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी व्यक्ति ठंड की मार झेलने को मजबूर न हो।

shelter homes in delhi
नई दिल्ली: दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के निर्देशों का पालन करते हुए सरकार ने कड़ाके की ठंड में बेघर लोगों को सुरक्षित रखने के लिए अपने आश्रय अभियान को और तेज कर दिया है। एम्स, सफदरजंग और जी. बी. पंत जैसे अस्पतालों के बाहर बेसहारा लोगों को तुरंत मदद पहुंचाई जा रही है। इन इलाकों में रैन बसेरे की संख्या में भी इजाफा किया गया है। साथ ही, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) और शेल्टर मैनेजमेंट एजेंसियां खुले में सो रहे लोगों को लगातार रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं। रैन बसेरों में लोगों के रहने के लिए बिस्तर, तीन समय का खाना, साफ-सफाई और पीने के पानी जैसी जरूरी सुविधाएं मुफ्त दी जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि विंटर एक्शन प्लान 2025-26 के तहत ठंड से बचाव के लिए राजधानी के संवेदनशील और अधिक भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में लगभग 250 अस्थायी ‘पगोडा’ रैन बसेरे भी स्थापित किए गए हैं। साथ ही, डूसिब द्वारा वर्तमान में पूरी दिल्ली में 197 स्थायी रैन बसेरे दिन-रात चलाए जा रहे हैं, जिनमें सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

  • मुख्यमंत्री ने बताया कि एम्स-सफदरजंग क्षेत्र में पहले से मौजूद 320 बेड वाले 32 पगोडा रैन बसेरों के अलावा 3 नए पगोडा रैन बसेरे और लगाए गए हैं। इससे इस इलाके में रैन बसेरों की कुल क्षमता बढ़कर 350 बेड हो गई है। उन्होंने बताया कि एम्स और सफदरजंग अस्पताल के आसपास बेघर लोगों की अधिक संख्या को देखते हुए वहां के सबवे क्षेत्र में भी अस्थायी शरण की व्यवस्था की गई।
  • जरूरतमंद लोगों को तुरंत कंबल और बिस्तर उपलब्ध करा जा रहे हैं ताकि उन्हें ठंड से बचाया जा सके। विशेष अभियान के तहत एम्स-सफदरजंग क्षेत्र से लगभग 75 बेघर लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इसके बाद इस क्षेत्र को खुले में सोने वाले लोगों से मुक्त किया गया।
  • मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि जी. बी. पंत अस्पताल के आसपास भी 8 अस्थायी ‘पगोडा’ रैन बसेरे स्थापित किए गए हैं। इनमें 80 लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। रैन बसेरों का संचालन कर रही एजेंसियां प्रतिदिन रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक नियमित निरीक्षण कर रही हैं, ताकि खुले और असुरक्षित स्थानों पर सो रहे बेघर लोगों को समय रहते रैन बसेरों तक पहुंचाया जा सके। साथ ही, एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष भी चौबीसों घंटे काम कर रहा है।
  • मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि दिल्ली सरकार केवल आश्रय की व्यवस्था तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शहर में सतर्कता और बचाव तंत्र को भी सक्रिय किया गया है। सरकार बेघर नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और मानवीय देखभाल को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। सरकार सर्दी के मौसम सहित हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि राजधानी में कोई भी व्यक्ति असहाय और असुरक्षित न रहे।
अशोक उपाध्याय

लेखक के बारे मेंअशोक उपाध्यायअशोक उपाध्याय, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर ड‍िज‍िटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पत्रकारिता में 10 साल का अनुभव। साल 2014 में नवभारत टाइम्स हिंदी अखबार से पत्रकारिता के सफर की शुरुआत की थी। पॉलिटिक्स, खेल, क्राइम बीट पर रिपोर्टिंग में महारत। अमर उजाला देहरादून में भी सेंट्रल डेस्क पर काम किया है। साथ ही कई चुनावों में ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। पिछले पांच साल से NBT डिजिटल में न्यूज डेस्क पर काम कर रहे हैं। गूगल ट्रेंड्स को पकड़ने और एआई टूल्स के इस्तेमाल की अच्छी समझ है। JIMMC नोएडा से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।… और पढ़ें