दिल्ली में कई बड़े स्कूल ट्रैफिक के लिहाज से बेहद व्यस्त सड़कों के आस-पास बने हुए है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान मे रखते हुए सेफ स्कूल जोन डिवेलप करना बेहद जरूरी है।

PWD अफसरों के अनुसार सेफ जोन योजना के तहत स्कूल क्लस्टर के आसपास दोनों तरफ 500 मीटर स्ट्रेच में बच्चों की आवाजाही सुरक्षित बनाने के साथ-साथ ही रोड रीडिजाइन भी किया जाएगा। जिस रोड के पास सेफ स्कूल जोन डिवेलप करने का प्रस्ताव है, उसके आसपास ही करीब 10-12 स्कूल हैं और इन सभी स्कूलों में करीब 8 से 10 हजार बच्चे पढ़ते हैं।
- सुबह स्कूल आने के समय और दोपहर में छुट्टी के वक्त बच्चों के चलते काफी भीड़ होती है।
- तेज रफ्तार इस रोड पर गाड़ियों की आवाजाही के चलते रोड एक्सिडेंट का खतरा हमेशा बना रहता है। इसलिए यहां सेफ स्कूल जोन डिवेलप करने का प्लान बनाया गया है।
- रोड डिजाइनिंग के साथ ही इस क्षेत्र में गाड़ियों की स्पीड लिमिट भी तय नियमों के अनुसार की जाएगी।
- इसके अलावा स्पीड ब्रेकर, जेब्रा क्रॉसिंग और रोड साइनेज भी रोड कांग्रेस के नियमों के अनुसार लगाया जाएगा।
- स्कूल के खुलने और बंद होने के समय यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ट्रैफिक पुलिस मौजूद रहे।
- इसके अलावा रोड के 500 मीटर के स्ट्रेच में फुटपाथ को और अधिक चौड़ा किया जाएगा।
क्या होगा खास?
- उचित संख्या और स्थानों पर स्पीड ब्रेकर और साइनेज लगाना
- फुटपाथ की चौड़ाई सामान्य की तुलना में 300मी. तक अधिक रखना
क्यों है सेफ स्कूल जोन बनाने की जरूरत?
दिल्ली में कई बड़े स्कूल ट्रैफिक के लिहाज से बेहद व्यस्त सड़कों के आस-पास बने हुए है। स्कूल खुलने और छुट्टी के वक्त इन स्कूलों के बाहर बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों का पैदल आना-जाना होता है, लेकिन ज्यादातर स्कूलों के आस-पास पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए कोई खास इंतजाम नही है। जेब्रा कॉसिंग, स्पीड ब्रेकर, पेडस्ट्रियल लाइट्स और प्रॉपर साइनेज के अभाव के चलते बच्चों की सुरक्षा पर हर वक्त खतरा मंडराता रहता है। इसी को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने सेफ स्कूल जोन बनाने की पहल की है, ताकि बच्चे सुरक्षित तरीके से सड़क पार कर सके।
