दिल्ली विधानसभा का शीतकालीन सत्र 5 जनवरी से शुरू होकर 8 जनवरी तक चलेगा। इस तीन दिवसीय सत्र में वायु प्रदूषण और साफ-सफाई जैसे मुद्दों पर हंगामे की संभावना है। सत्र की तैयारियों के तहत अध्यक्ष ने कैग रिपोर्टों पर की गई कार्रवाई की स्थिति का जायजा लिया।

सीएजी की रिपोर्ट और फांसी घर के मुद्दे पर भी हंगामे के आसार
सूत्रों के मुताबिक सरकार नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की कुछ लंबित रिपोर्टों को पेश करने की तैयारी कर रही है, जिससे आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच तीखी बहस छिड़ सकती है। विधानसभा के ‘फसी घर’ विवाद में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की लगातार अनुपस्थिति पर भी गरमागरम बहस होने की आशंका है।
इस बार के शीतकालीन सत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा
इस शीतकालीन सत्र में विधानसभा के डिजिटल कामकाज में परिवर्तन के साथ एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव भी देखने को मिलेगा। अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने हाल ही में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रश्न, नोटिस, उत्तर और विधेयक प्रस्तुत करने सहित सभी विधायी कार्य अब पूरी तरह से राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन के माध्यम से किए जाएंगे।
ई विधान एप्लिकेशन के आने से पारदर्शिता बढ़ेगी
अधिकारियों के मुताबिक कागजी कार्रवाई बंद करने से पारदर्शिता बढ़ेगी, संचार सुगम होगा और विधायी प्रक्रियाओं में होने वाली देरी समाप्त होगी। गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि विभागों और विधानसभा के बीच डिजिटल समन्वय को मजबूत करना जवाबदेही और कुशल शासन के लिए आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आगामी सत्र में ई-विधान परियोजना के सुचारू रूप से क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सभी व्यवस्थाएं और समन्वय समय पर पूरे कर लिए जाएं।
