दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने 1984 सिख विरोधी दंगे में आरोपी सज्जन कुमार के बरी होने को चुनौती देने के फैसले को चुनौती देने का फैसला किया है। कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार को निचली अदालत ने एक मामले में गुरुवार को रिहा कर दिया था।

भीड़ का नेतृत्व करने का था आरोप
डीएसजीएमसी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह कहलों ने एक बयान में कहा कि एक-दो नवंबर 1984 को तीन सिखों की हत्या कर दी गई थी और इस मामले में पांच गवाहों ने बयान दर्ज कराए थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि हत्याओं के लिए जिम्मेदार भीड़ का नेतृत्व सज्जन कुमार कर रहे थे, इसके बावजूद अदालत ने उन्हें बरी कर दिया। डीएसजीएमसी पदाधिकारियों ने कहा कि फैसले की प्रति मिलने के बाद उसका विस्तार से अध्ययन किया जाएगा और फिर उच्च न्यायालय में उसे चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय में गवाहों के बयान दर्ज कराकर समिति यह सुनिश्चित करेगी कि कुमार को इस मामले में भी सजा मिले।
मुख्य गवाह रविंद्र कोहली की मौत
डीएसजीएमसी ने एक बयान में कहा कि रविंदर सिंह कोहली की मौत हो चुकी है, इसलिए उनकी गवाही दर्ज नहीं की जा सकी। कोहली इस मामले में मुख्य गवाह थे, जिनके सामने भीड़ ने उनके साथियों अवतार सिंह और सोहन सिंह की हत्या कर दी थी। कोहली की गवाही बेहद महत्वपूर्ण थी, लेकिन उनकी मौत के कारण बयान दर्ज नहीं किए जा सके।”
42 साल बाद आरोपी का बरी होना दुखद
बयान में कहा गया है कि अदालत के फैसले से सिख समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं, क्योंकि 42 साल बाद भी आरोपी को बरी किया जा बेहद दुखद है। डीएसजीएमसी ने कुमार पर उनके तत्कालीन संसदीय क्षेत्र पश्चिम दिल्ली में भीड़ को उकसाने का आरोप लगाया। उसने कहा, “अन्य मामलों में दी गई आजीवन कारावास की सजा, जिसे वह पहले से ही काट रहे हैं, यह साबित करती है कि सज्जन कुमार ही भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे।”
