दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने स्टेज-IV कोलन कैंसर के एक जटिल मामले में 43 वर्षीय महिला की जान बचाई है। कई अंगों में फैल चुके कैंसर के लिए दो चरणों में हुई सर्जरी में करीब 19.9 किलो का ट्यूमर निकाला गया।

जांच में आया सामने
दरअसल, पश्चिम बंगाल की दुर्गापुर की 43 साल की महिला को 7 महीने पहले कोलन कैंसर का पता चला था। कई अस्पतालों में इलाज और कई साइकल कीमोथेरेपी के बावजूद बीमारी लगातार बढ़ती रही। जांच में सामने आया कि कैंसर पेट के अंदर कई अंगों में फैल चुका था। सीटी स्कैन में कोलन, ब्लैडर, यूट्रस और अन्य अंग अलग-अलग पहचान में नहीं आ रहे थे। पूरा पेट एक बड़े मांस में बदल चुका था।
दो चरणों में की गई हाई रिस्क सर्जरी
जांच के बाद डॉ. एमडी रे ने ऑपरेशन दो चरणों में किया। पहले चरण में बड़े ट्यूमर को हटाया गया, लेकिन ऑपरेशन के दौरान मरीज की हालत खराब हो गई। दो दिन बाद मरीज के स्थिर होने पर दूसरा और ज्यादा जटिल ऑपरेशन किया गया। 12 जनवरी को हुई सर्जरी में करीब 19.9 किलो का ट्यूमर निकाला। इसमें असेंडिंग कोलन, इलियम का हिस्सा, ट्रांसवर्स और सिग्मॉइड कोलन, ओमेंटम, यूट्स, दोनों ओवरी, फेलोपियन ट्यूब और पेरिटोनियम शामिल थे। लिवर कैप्सूल का भी रिसेक्शन किया गया।
खास तकनीक से बीमारी खत्म
सर्जरी के बाद मरीज को हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी दी गई। ऑपरेशन के बाद मरीज को आईसीयू मे रखा गया। पहले ही पोस्ट ऑपरेटिव दिन मरीज की हालत स्थिर रही। पांचवे दिन मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पूरी प्रक्रिया लगभग 5 दिनो मे पूरी हुई। डॉ. रे के मुताबिक, मरीज को आगे मेटिनेस कीमोथेरेपी दी जाएगी। जरूरत के अनुसार टारगेटेड थेरेपी भी दी जा सकती है।
‘इसे लाइलाज मानना सही नहीं’
डॉ. एमडी रे का कहना है कि मेटास्टेटिक कोलन कैंसर को केवल ट्यूमर के साइज के आधार पर अनरिसेक्टेबल नहीं कहा जाना चाहिए। असली चुनौती मल्टीपल ऑर्गन इन्वॉल्वमेट होती है। अनुभवी हाथों और हाई-वॉल्यूम सेटर मे ऐसे मरीजों को भी सर्जरी से ठीक किया जा सकता है। डॉ. रे के अनुसार, कोलन कैंसर महिलाओं में तीसरा और पुरुषो मे छठा सबसे आम कैसर है।
