दिल्ली हाई कोर्ट ने गलत जानकारी देकर नौकरी पाने पर टर्मिनेशन को सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि गलत तथ्यों के आधार पर नौकरी पर बने रहने का अधिकार किसी को नहीं है।

क्या था मामला
जस्टिस अवनीश झिंगन ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जिसमें रोहित खत्री नाम के शख्स ने फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) द्वारा नौकरी से निकाले जाने के फैसले को चुनौती दी थी। रोहित छह साल तक नौकरी पर रहा लेकिन बाद में उसकी ओबीसी कैटेगरी की पात्रता पर सवाल उठे और हाई लेवल कमिटी ने उसका OBC सर्टिफिकेट रद्द कर दिया।
याचिकाकर्ता ने की थी ये मांग
कारण यह था कि उसकी कम्युनिटी का नाम केंद्र सरकार की OBC लिस्ट में था ही नहीं। याचिकाकर्ता ने तीन आदेशों को रद्द करने की मांग की थी। इनमें नौकरी से निकाले जाने, अपील खारिज होने और समीक्षा से इनकार करने का आदेश शामिल था। उसके वकील ने दलील दी कि विज्ञापन में कहीं भी यह शर्त नहीं थी कि कैंडिडेट की कास्ट केंद्र की OBC लिस्ट में ही होनी चाहिए इसलिए उसे हटाना गलत है।
कैटेगरी का लाभ लेने के लिए योग्य नहीं
FCI ने कोर्ट में कहा कि हाई लेवल कमिटी की जांच के बाद यह साफ हो गया कि याचिकाकर्ता OBC कैटेगरी का लाभ लेने के योग्य नहीं था। उसने स्टेट लिस्ट के आधार पर बना OBC सर्टिफिकेट जमा किया था, जबकि उसने डिक्लेरेशन दिया था कि वह केंद्र सरकार की OBC कैटेगरी में आता है।
नौकरी से हटाना पूरी तरह सही
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि जब सर्टिफिकेट ही अमान्य पाया गया और याचिकाकर्ता आरक्षित पद के लिए योग्य नहीं था तो नौकरी से हटाना पूरी तरह सही है। कोर्ट ने कहा कि आरक्षित श्रेणी में बने रहने का उसका कोई अधिकार नहीं था।
