राजधानी दिल्ली के मेट्रो स्टेशनों का नाम तय करने का अधिकार अब सिर्फ दिल्ली सरकार का होगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह ऐलान कर दिया है।

मीटिंग में मेट्रो स्टेशनों के नामकरण के मामले पर चर्चा हुई, जिसकी अध्यक्षता CM ने की। यह तय किया गया कि मेट्रो स्टेशनों के नाम स्टेट नेमिंग अथॉरिटी (SNA) फाइनल करेगी। साथ ही भविष्य के प्रोजेक्ट्स के लिए यह निर्देश दिया गया कि DMRC भले ही DPRs में मेट्रो स्टेशनों के संभावित नाम शामिल कर सकती है, लेकिन फाइनल नाम SNA ही तय करेगी। एक अधिकारी ने आगे कहा कि DMRC ने DPRs में सुझाए गए नाम सिर्फ संकेत के तौर पर होंगे। जो मेट्रो स्टेशन पूरे हो चुके हैं लेकिन अभी चालू नहीं हुए हैं, उनके लिए DMRC को जल्द से जल्द सरकार को नामों की एक लिस्ट जमा करने का निर्देश दिया गया है।
तीन स्टेशनों का बदलेंगे नाम
स्टेशन का नाम बदलने को लेकर हालिया बहसों के बीच यह फैसला अहमियत रखता है। नवंबर में गुप्ता ने यात्रियों की सुविधा बेहतर बनाने और लोकल पहचान दिखाने के लिए तीन मेट्रो स्टेशनों का नाम बदलने की घोषणा की थी। रेड लाइन पर पीतमपुरा स्टेशन का नाम बदलकर मधुबन चौक किया जाएगा, इससे पहले कि इसे मैजेंटा लाइन के साथ इंटरचेंज बनाया जाए। फेज-IV के दो अंडर-कंस्ट्रक्शन स्टेशनों का नाम भी बदलकर नॉर्थ पीतमपुरा-प्रशांत विहार और हैदरपुर विलेज किया जाएगा।
बार-बार मिल रही रिक्वेस्ट
बता दें कि दिल्ली मेट्रो को केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों की भागीदारी वाली एक स्पेशल पर्पस व्हीकल चलाती है। यह पारंपरिक रूप से स्टेशनों का नाम लोकल जगहों या इलाकों के नाम पर रखती आई है। हालांकि, हाल के सालों में सरकार को पब्लिक प्रतिनिधियों और निवासियों के ग्रुप्स से नाम बदलने के लिए बार-बार रिक्वेस्ट मिल रही हैं, जिसमें अक्सर उस जगह की लोकल पहचान को दिखाने की जरूरत होती है।
