साल 2020 में दिल्ली दंगों की साजिश रचने के मामले में आरोपियों में शामिल गुलफिशा फातिमा बुधवार को तिहाड़ जेल से बाहर आ गई। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मामले में 5 आरोपियों में तीन को जमानत दे दी थी।

इससे पहले दिन में, दिल्ली की एक अदालत ने शीर्ष अदालत के निर्देशानुसार चारों आरोपियों को 2 लाख रुपये के जमानत बॉण्ड भरने और दो स्थानीय जमानतदार पेश करने के बाद रिहा करने का आदेश जारी किया। पांचवां आरोपी, जिसे सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी थी, जमानत बॉण्ड भरने के लिए अदालत में पेश नहीं हुआ। अदालत ने गौर किया कि जमानत की सभी शर्तों का पालन किया गया था और दिल्ली पुलिस द्वारा जमानतदारों और दस्तावेजों की सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद उनकी रिहाई के आदेश पारित किए गए।
उमर खालिद, शरजील को नहीं मिली थी राहत
शीर्ष अदालत ने सोमवार को उमर खालिद और शरजील इमाम को राहत देने से इनकार कर दिया था। न्यायालय ने यह पाया था कि उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है, लेकिन संलिप्तता के क्रम का हवाला देते हुए पांच आरोपियों को जमानत दे दी गई थी।
फातिमा के मामले में, शीर्ष अदालत ने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान उसने कई प्रदर्शन स्थलों पर स्वतंत्र कमान, संसाधन नियंत्रण या रणनीतिक निगरानी नहीं रखी।
एनआरसी के विरोध में भड़के थे दंगे
कोर्ट ने कहा कि यह आरोप कि गुलफिशा फातिमा ने स्थानीय महिलाओं को संगठित किया और प्रदर्शन स्थल की व्यवस्था का समन्वय किया। हालांकि, अभियोजन पक्ष के मामले के लिए प्रासंगिक है, लेकिन इससे यह स्पष्ट नहीं होता कि उसने कई प्रदर्शन स्थलों पर स्वतंत्र कमान, संसाधन नियंत्रण या रणनीतिक निगरानी रखी। फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सीएए और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान दंगे भड़क उठे थे।
इनमें 53 लोग मारे गए और 700 से अधिक घायल हुए थे। मामले में नामजद 20 आरोपियों में से दो अब भी फरार हैं और शेष 18 ने जमानत के लिए अर्जी दी थी।
इन 18 आरोपियों में से सात – सलीम मलिक, शरजील इमाम, उमर खालिद, आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता ताहिर हुसैन, अतहर खान, तस्लीम अहमद और खालिद सैफी अभी जेल में हैं।
