दिल्ली के निजी स्कूलों ने स्कूल शिक्षा (फीस तय करने और रेगुलेशन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी। इस मामले में आज कोर्ट ने सरकार के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने आदेश में कहा कि कमेटियां 10 जनवरी की पिछली तारीख के बजाय 20 जनवरी तक बनाई जा सकती हैं। इसके अलावा, बेंच ने निर्देश दिया कि स्कूल मैनेजमेंट द्वारा कमेटी को प्रस्तावित फीस जमा करने की आखिरी तारीख 5 फरवरी तक बढ़ा दी जाएगी। पहले यह 25 जनवरी तक करना था।
इस कमेटी की स्वीकृति से ही होगी लागू
हाई कोर्ट ने यह आदेश राष्ट्रीय राजधानी के तमाम प्राइवेट स्कूलों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पारित किया। उन्होंने दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस तय करने और रेगुलेशन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। नए कानून में यह जरूरी है कि प्राइवेट स्कूलों में सभी फीस बढ़ोतरी को पैरंट्स, स्कूल मैनेजमेंट और सरकारी प्रतिनिधियों वाली एक पारदर्शी, तीन-स्तरीय कमिटी सिस्टम के जरिए से अप्रूव किया जाना चाहिए।
फीस रेगुलेशन कमेटी बनाने का निर्देश
दिल्ली के शिक्षा निदेशालय (DoE) द्वारा 24 दिसंबर, 2025 को जारी एक नोटिफिकेशन को भी कोर्ट में चुनौती दी गई है। नोटिफिकेशन में प्राइवेट गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को 10 जनवरी, 2026 तक एक स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी (SLFRC) बनाने का निर्देश दिया गया था। कमेटी में एक चेयरपर्सन, प्रिंसिपल, पांच पैरंट्स, तीन टीचर और DoE से एक प्रतिनिधि शामिल करने का निर्देश दिया गया था।
प्राइवेट स्कूलों की तरफ से ये हुए पेश
सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी प्राइवेट स्कूलों की एक एक्शन कमिटी की ओर से एडवोकेट कमल गुप्ता के साथ पेश हुए। रोहतगी ने कोर्ट में दलील दी कि हमने नए कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है और नोटिफिकेशन पर रोक लगाई जानी चाहिए क्योंकि यह अधिनियम के विपरीत और अवैध है। दिल्ली सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने कानून का बचाव किया। दलील दी कि यह संवैधानिक है और स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूलने पर रोक लगाने के लिए बनाया गया है।
निर्देश के पालन का बढ़ा दिया समय
दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि हालांकि वह नोटिफिकेशन पर रोक नहीं लगाएगा, लेकिन वह इसके निर्देशों का पालन करने का समय बढ़ा देगा। एएसजी ने अधिकारियों से निर्देश लेने के बाद इस प्रस्ताव पर सहमति जताई। इसके बाद कोर्ट ने नोटिफिकेशन का पालन करने का समय बढ़ा दिया। साथ ही दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग और एलजी को याचिकाओं पर जवाब देने के लिए चार हफ्तों का समय दिया। मामले में अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।
