Barapullah Bridge News: दिल्लीवासियों के लिए अच्छी खबर है। निजामुद्दीन के पास बना 17वीं सदी का बारापुला ब्रिज जल्द ही खुलने वाला है। फरवरी में इसे जनता के लिए खोला जाएगा लेकिन इस पर गाड़ियां नहीं चलेंगी। जानें वजह।

फरवरी में खुल रहा बारापुला ब्रिज
अधिकारियों का कहना है कि पुल खुलने के बाद भी ये गेट लगे रहेंगे। ऐसा इसलिए, क्योंकि पुल पर सिर्फ पैदल चलने वालों को ही जाने की इजाजत होगी। गाड़ियों को हमेशा के लिए रोक दिया जाएगा ताकि पुल की बनावट खराब न हो। ASI के दिल्ली सर्कल के सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट आरके पटेल ने बताया कि संरक्षण का ज्यादातर काम पूरा हो गया है। बस कुछ छोटी-छोटी चीजें बाकी हैं। कुछ जगहों पर थोड़ी-बहुत चिनाई का काम बाकी है, जिसमें करीब दो हफ्ते लगेंगे।
लंबे समय से अतिक्रमण का था शिकार
अधिकारियों के मुताबिक, इस पुल को ठीक करने में सबसे मुश्किल काम लंबे समय से जमे अतिक्रमण को हटाना था। करीब बीस साल से यहां एक बाजार लगा हुआ था, जहां अवैध दुकानें लगाकर सामान बेचा जाता था। आस-पास रहने वाले लोग भी पुल के कुछ हिस्सों को कूड़ा फेंकने के लिए इस्तेमाल करते थे। साल 2024 में, उपराज्यपाल वीके सक्सेना के निर्देश पर 120 से ज्यादा अवैध विक्रेताओं को हटाया गया।
एएसआई ने पुल को लिया संरक्षण में
सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट आरके पटेल ने बताया कि जैसे ही अतिक्रमण हटाया गया, ASI ने तुरंत पुल को सुरक्षित किया। बैरिकेडिंग लगाई और संरक्षण का काम शुरू कर दिया। जांच में पता चला कि पुल की बनावट काफी हद तक ठीक है। हालांकि, लंबे समय तक इस्तेमाल और गलत तरीके से उपयोग करने की वजह से कुछ हिस्से थोड़े खराब हो गए थे। ASI ने इन समस्याओं को दूर कर दिया है।
बारापुला ब्रिज को लेकर उठाए गए ये कदम
- यह प्रोजेक्ट 2024 के आखिर में दिसंबर में शुरू हुआ था।
- ASI ने पुल की बनावट को ठीक करने का काम किया।
- नगर निगम दिल्ली और दिल्ली विकास प्राधिकरण ने पुल के आसपास की सफाई और सौंदर्यीकरण का काम संभाला
- पुल के दोनों तरफ मलबा, ढकी हुई सुरक्षा दीवारों की खुदाई और मरम्मत का काम शामिल है।
- पुल का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए दोनों सिरों पर लोहे के गेट लगाए गए हैं।
- एक गेट निजामुद्दीन स्टेशन के पास है, जो सितंबर 2024 में पूरा हुआ।
- दूसरा गेट जंगपुरा की तरफ है, जो पिछले फरवरी में बनकर तैयार हुआ।
- प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार, ASI ने मशीनों की मदद से 600 घन मीटर से ज्यादा बिटुमिनस सतह और 1500 घन मीटर से ज्यादा पुराने प्लास्टर को हटाया गया
कहां है बारापुला ब्रिज, क्यों पड़ा ये नाम
- यह ब्रिज खान-ए-खाना के मकबरे से करीब एक किलोमीटर पूर्व में, पुरानी मथुरा रोड के किनारे स्थित है।
- इसकी खास बनावट में 11 मेहराबदार हिस्से हैं, जो 12 खंभों पर टिके हैं।
- इसी वजह से इसका नाम बारापुल या 12 खंभों वाला पुल पड़ा।
- यह पुल 195 मीटर लंबा और 14 मीटर चौड़ा है। हर खंभे के ऊपर दो मीटर ऊंचा एक मीनार भी बना है।
- ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि यह पुल 1621-22 में बनाया गया था।
- इसे मिहर बानफी आगा के संरक्षण में बनवाया गया था, जो बादशाह जहांगीर के दरबारी थे।
- यह पुल कभी मुगल शासकों के लिए आगरा से निजामुद्दीन दरगाह और हुमायूं के मकबरे तक जाने का महत्वपूर्ण रास्ता था।
- उस समय इसे सबसे बेहतरीन पुलों में से एक माना जाता था।
