दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व विधानसभाध्यक्ष रामनिवास गोयल को ‘फांसीघर’ मुद्दे पर पत्र लिखा है। विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट के अनुसार, केजरीवाल, गोयल, मनीष सिसोदिया और राखी बिड़लान ने समिति के समक्ष उपस्थित न होकर सदन की अवमानना की है। भाजपा ने केजरीवाल से माफी की मांग की है।

पिछले साल सत्ता में आने के बाद भाजपा ने उठाया था मुद्दा
ब्रिटिश काल की दिल्ली विधानसभा की इमारत के एक कमरे का उद्घाटन नौ अगस्त, 2022 को तत्कालीन मुख्यमंत्री केजरीवाल ने ‘फांसीघर’ के रूप में किया था। पिछले साल भाजपा के सत्ता में आने के बाद विधानसभा में यह मुद्दा उठाया गया था। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दावा किया कि जिसे ‘फांसीघर’ कहा जा रहा है, वह वास्तव में भोजन वितरण के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला ‘टिफिन रूम’ था।
उन्होंने विधानसभा भवन के वास्तुशिल्प डिजाइन के 2011 के एक मानचित्र के माध्यम से इसकी पुष्टि की। भाजपा ने केजरीवाल से माफी की मांग की है और आरोप लगाया है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी (‘आप’) की पिछली सरकार ने ‘झूठे’ दावे के जरिए लोगों को गुमराह किया। इस मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजा गया था, जिसने छह जनवरी को विधानसभा में अपनी रिपोर्ट पेश की थी।
सदन ने एक प्रस्ताव को भी दी मंजूरी
सदन ने एक प्रस्ताव को भी मंजूरी दी जिसमें केजरीवाल और ‘आप’ के अन्य नेताओं को समिति के समक्ष उपस्थित होने और पिछले साल 13 नवंबर और 20 नवंबर को हुई सुनवाई से अपनी अनुपस्थिति पर स्पष्टीकरण देने तथा विधानसभा परिसर में ‘फांसीघर’ के दावे के संबंध में जानकारी या दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। सदन ने विधानसभा अध्यक्ष गुप्ता को विशेषाधिकार समिति के समक्ष ‘आप’ नेताओं की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के वास्ते अधिकृत भी किया है।
