दिल्ली हाई कोर्ट ने गाजीपुर मुर्गा मंडी में मुर्गियों और अन्य पक्षियों की लगातार हो रही अवैध कटाई को भयानक करार दिया है।

कोर्ट ने एमसीडी और अन्य सिविक एजेंसियों को अपने पिछले आदेशों का पालन न करने के आरोप वाली कोर्ट की अवमानना याचिका पर दो हफ्तों में जवाब देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी। गुरुवार को सुनवाई के दौरान, मौलेखी ने कुछ तस्वीरें पेश कीं, जिससे कि यह दिखाया जा सके कि कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन किया जा रहा है।
कोर्ट ने इलाके में पक्षियों की कटाई पर रोक लगा दी थी। अधिकारियों से सभी पर्यावरण और प्रदूषण की रोकथाम से जुड़े नियमें का पालन करते हुए एक प्रॉपर मार्केट स्थापित करने की योजना बनाने को कहा था। एडवोकेट तुषार सन्नू ने एमसीडी की ओर से कोर्ट में कहा कि निगम ने गलती करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की है। अगर कोई बिना लाइसेंस के बूचड़खाना चलाता हुआ या लाइसेंस की शर्तो का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है तो निगम कार्रवाई करेगा।
बेनतीजा रही थी गाजीपुर मुर्गा मंडी की पिछली जांच
2023 में भी इसी तरह की एक अवमानना याचिका हाई कोर्ट में गौरी मौलेखी ने दायर की थी। उन्होंने तब भी गाजीपुर मुर्गा मडी में पर्यावरण नियमों के खिलाफ पक्षियों की कटाई का दावा करते हुए हाई कोर्ट के 2018 के आदेश की अवमानना का आरोप लगाया था। लेकिन, कोर्ट के निर्देश पर जांच पर निकले अधिकारियों को तब वहा न तो कोई अवैधता नजर आई और न ही किसी कानून का उल्लघन होता मिला। नतीजतन, कोर्ट ने रिपोर्ट पर यकीन कर लिया और याचिका को निपटा दिया। अब तीन साल बाद फिर उसी तरह के आरोपो के साथ नई अवमानना याचिका कोर्ट के सामने है, यह तय करना है कि क्या कार्यकर्ता के दावे बे दम है या अधिकारियों की ओर से
कार्रवाई के नाम पर बस खानापूर्ति हो रही है।
