दिल्ली नगर निगम की टोल प्लाजा को लेकर लगातार मुश्किलें बढ़ती जा रही है। एक ओर जहां NHAI कुछ टोल प्लाजा को हटाने की मांग कर रहा है। वहीं गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GDMA) ने मांग की है कि NH-48 पर रजोकरी /सिरहौल टोल प्लाजा से वसूली जाने वाली धनराशि का आधा हिस्सा उसे दिया जाए।

जीडीएमए ने भी कोर्ट में एक याचिका दायर की है और मांग की है कि एनएच 48 पर रजोकरी/सिरहौल टोल प्लाजा से एमसीडी जितना टैक्स कलेक्शन करती है, उसका 50 प्रतिशत जीडीएमए को दे या फिर टोल प्लाजा हटाए। जीडीएमए का तर्क है कि एमसीडी का टोल प्लाजा जीडीएमए के कार्य क्षेत्र में बना है और उसे भी इसका लाभ मिलना चाहिए।
NHAI कर रहा 9 टोल हटाने की मांग
एनएचएआई पहले से ही एमसीडी के 9 टोल हटाने की मांग कर रहा है। NHAI अफसरों की दलील है कि एमसीडी के टोल का कोई खास फायदा नहीं है, एमसीडी ने इसे सिर्फ रेवेन्यू के उद्देश्य से बनाया है। जिससे रोजाना लोगों को परेशानी हो रही है।
MCD के 126 टोल प्लाजा
अफसरों का कहना है कि MCD के 126 टोल प्लाजा हैं, जिसमें से 13 ऐसे है जहां गाड़ियों की एंट्री RFID टैग से होती है। MCD टोल टैक्स के साथ ही एनवायरनमेंट कंपन्सेशन चार्ज (ईसीसी) भी वसूल करती है। पिछले साल दिसंबर तक ईसीसी के रूप में कुल 1753 करोड़ रुपये वसूले थे, जिसमें से दिल्ली की आबोहवा को ठीक करने के लिए सिर्फ 781.4 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए। ईसीसी का 971.8 करोड़ रुपये इस्तेमाल ही नहीं हो पाया है।
