JNUSU ने स्टूडेंट्स पार्लियामेंट का आयोजन किया, जिसमें कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई। इसमें से एक मुद्दा छात्रों के निलंबन का भी था। इसमें अलग-अलग छात्र संगठनों के राष्ट्रीय नेताओं ने हिस्सा लिया।

निलंबन की कड़ी निंदा की गई
विपक्षी छात्र संगठनों ने वीबीएसए बिल को सार्वजनिक शिक्षा और संघीय ढांचे पर हमला करार दिया और जेएनयूएसयू नेताओं के निलंबन की कड़ी निंदा की। सत्र की शुरुआत ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) के राष्ट्रीय सचिव प्रसेनजीत ने की। उन्होंने पब्लिक एजुकेशन के महत्व पर जोर देते हुए वीबीएसए को हमला बताया और देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया। एसएफआई की ऑल इंडिया वाइस प्रेसिडेंट शिल्पा सुरेंद्रन ने JNUSU के आंदोलन में एकजुटता जताई और निलंबन की निंदा की। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने छात्र संघ चुनावों को देश भर में रोक दिया है। वीबीएसए बिल में फंडिंग एक बड़ा मुद्दा है, जो सार्वजनिक उच्च शिक्षा को खत्म करने के लिए डिजाइन किया गया है।
लोकतंत्र को खत्म करने का पैटर्न
डीएसएफ की मुंतहा और जेएनयूएसयू की पूर्व जनरल सेक्रेटरी ने नजीब अहमद की घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जेएनयू प्रशासन ने नजीब को पीटे जाने पर चुप्पी साधी और दोषियों को बचाने की कोशिश की। एनएसयूआई के राष्ट्रीय नेता अखिलेश यादव ने जेएनयूएसयू पदाधिकारियों के प्रति एकजुटता जताई और कहा कि छात्र संघ चुनाव रोकना लोकतंत्र को खत्म करने का पैटर्न है।
नहीं ली गई विशेषज्ञ की सलाह
एआईडीएसओ की जॉइंट सेक्रेटरी श्रेया ने वीबीएसए और एनईपी को सरकार की फासीवादी विशेषताओं की अभिव्यक्ति बताया और वामपंथी संगठनों के नेतृत्व में व्यापक आंदोलन का आह्वान किया। एमएसएफ के प्रेसिडेंट अहमद साजू ने वीबीएसए को आरएसएस (राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ) विचारधारा पर आधारित बताया और कहा कि बिल बनाते समय किसी एक्सपर्ट या स्टेकहोल्डर से सलाह नहीं ली गई। उन्होंने रोहित एक्ट लागू करने की मांग की और सभी लोकतांत्रिक छात्र संगठनों के गठबंधन का आह्वान किया। यूओएच एएसए यूनिट के प्रेसिडेंट दयानिधि ने कहा कि शिक्षा को सामाजिक न्याय से अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने छात्रसंघ पर भाजपा के हमलों का जिक्र किया और रोहित वेमुला की संस्थागत हत्या को याद किया।
