दिल्ली हाई कोर्ट ने राजधानी दिल्ली में बढ़ते लापता व्यक्तियों के मामले में दायर याचिका पर चिंता व्यक्त की है।

याचिकाकर्ता ने किया दावा
एनजीओ ‘फ्रीडम रिक्लेम्ड’ द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में एक ‘‘अभूतपूर्व संकट’’ है क्योंकि 2026 के पहले 15 दिनों में 800 से अधिक लोगों के लापता होने की खबरें हैं।याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि ‘‘खोजे जाने का अधिकार’’ संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का एक अभिन्न अंग है, और उपलब्ध आंकड़े दर्शाते हैं कि गुमशुदगी की घटनाएं अब अलग-थलग मामले नहीं रह गए हैं बल्कि इनसे स्पष्ट होता है कि ‘‘निवारक पुलिसिंग और जांच प्रभावशीलता में संरचनात्मक विफलता’’ उत्पन्न हुई है।
याचिका में कहा गई ये बात
वकील अभिषेक तिवारी के जरिए दायर याचिका में कहा कि वर्तमान स्थिति इतनी गंभीर और चिंताजनक है कि इस माननीय न्यायालय के लिए एक मानक जांच की ‘प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं’ से परे देखना आवश्यक हो गया है। याचिकाकर्ता ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि एक पखवाड़े में 800 लोगों के लापता होने की भयावह दर अपराध, मानव तस्करी और अन्य गंभीर संगठित आपराधिक गतिविधियों के फलते-फूलते तंत्र की ओर इशारा करती है। याचिका में कहा गया कि दिल्ली पुलिस द्वारा अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016 और 15 जनवरी 2026 के बीच दिल्ली में लापता हुए व्यक्तियों की कुल संख्या 2,32,737 है, जिनमें से 52,326 व्यक्तियों के बारे में आज तक कोई सुराग नहीं है।
