दिल्ली सरकार ने 2023 में यमुना में आई भयंकर बाढ़ से सबक लेते हुए जापान के मॉडल को अपनाने पर विचार किया जा रहा है। जिससे 2023 जैसे हालात दोबारा न बन पाए।

पानी रोकने के लिए बनाए जा रहे बांध
इससे भारी बारिश के बाद भी नदियों के किनारे पानी रोकने के लिए जो ऊंचे-ऊंचे बांध बनाए गए हैं, उनके ऊपर से पानी नहीं बह पाता है। इसके अलावा यमुना के उपरी प्रवाह क्षेत्र में रेणुकानी, किशाऊ, लखवार-व्यासी और हथनीकुंड जैसे बांध निर्माण के लिए भी प्रस्ताव बनाए जा रहे हैं।
कमिटी ने दिया ये सुझाव
सिंचाई व बाढ़ विभाग के अफसरों का कहना है कि साल 2023 में यमुना में बाढ़ आई थी, जिसका पानी आईटीओ तक पहुंच गया था। यमुना में बाढ़ के हालात फिर से ऐसे न बने इसके लिए जल शक्ति मंत्रालय के वॉटर रिसोर्स, रिवर डिवेलपमेंट एड गंगा रेजुवेनशन डिपार्टमेंट ने एक जॉइंट फ्लड मैनेजमेंट कमिटी बनाई। कमिटी ने यमुना में बाढ़ से बचाव के लिए कुछ उपाय सुझाया है।
रिपोर्ट में कही गई ये बात
रिपोर्ट में कहा गया है कि यमुना के पूर्वी व पश्चिमी तटों का निर्माण 1978 में आई बाढ़ के बाद किया गया था। साल 1978 में दिल्ली में जितनी बारिश हुई थी, उसकी तुलना में साल 2023 में करीब 23.8% अधिक बारिश हुई थी। जिसके चलते यमुना में 6999 क्यूमेक (2,40,135.69 क्यूसेक) पानी बह रहा था। यमुना में अगर 6700 क्यूमेक पानी भी होता है, तो 1978 में बने बांधों के ऊपर से पानी बहने लगता है, इसलिए भविष्य में यमुना में बाढ़ की स्थिति से बचाव के लिए बाधों को और अधिक ऊचा करना जरूरी है।
