कोर्ट ने आदेश में क्या कहा
स्पेशल जज (PC एक्ट) जितेंद्र सिंह ने मामले में आरोपों पर अपना आदेश सुनाते हुए कहा कि आबकारी नीति में कोई व्यापक साजिश या आपराधिक मंशा नहीं थी। लिहाजा, अदालत ने सीबीआई को आदेश दिया कि वह इन सभी 23 लोगों के खिलाफ अपना केस बंद कर दे। अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन का केस न्यायिक स्क्रूटनी में टिक नहीं पाता क्योंकि सीबीआई ने सिर्फ अंदाजे के आधार पर साजिश की कहानी बनाने की कोशिश की थी। इस तरह सीबीआई इन 23 आरोपियों में से किसी के भी खिलाफ कोई प्रथम दृष्टया केस खड़ा करने में नाकाम साबित हुई।
अदालत ने सीबीआई की भी खिंचाई की
अदालत ने अपना आदेश सुनाते हुए अप्रूवर के बयानों के जरिए अपना केस बनाने के लिए सीबीआई की खिंचाई भी की। जज ने कहा, अगर इस तरह के काम की इजाजत दी जाती है, तो यह संविधान के सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन होगा। ऐसा काम गलत है, जिसमें किसी आरोपी को माफी दे दी जाती है और फिर उसे सरकारी गवाह बना दिया जाता है, उसके बयानों का इस्तेमाल जांच/कहानी में कमियों को भरने और दूसरे लोगों को आरोपी बनाने के लिए किया जाता है।
कोर्ट के आदेश में जिन्हें मिली राहत
स्पेशल जज ने यह भी कहा कि वह उन सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश करेंगे जिन्होंने एक सरकारी कर्मचारी (कुलदीप सिंह) को मामले में नंबर एक आरोपी बनाया था। इस आदेश से जिन्हें बड़ी राहत मिली, उनमें कुलदीप सिंह के अलावा नरेंद्र सिंह, विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली, अरुण रामचंद्र पिल्लई, मूथा गौतम, समीर महेंद्रू, मनीष सिसोदिया, अमनदीप सिंह ढल, अर्जुन पांडे, बुच्चीबाबू गोरंतला, राजेश जोशी, दामोदर प्रसाद शर्मा, प्रिंस कुमार, अरविंद कुमार सिंह, चनप्रीत सिंह रयात, कविता कलवकुंतल @ के.कविता, अरविंद केजरीवाल, दुर्गेश पाठक, अमित अरोड़ा, विनोद चौहान, आशीष चंद माथुर और सरथ चंद्र रेड्डी का नाम शामिल है।
आज एक बार फिर देश के संविधान पर गर्व हो रहा है और आज सत्य की जीत हुई है।
मनीष सिसोदिया
जिस केस में राहत मिली..
दिल्ली एक्साइज़ पॉलिसी मामला दिल्ली सरकार की 2021-22 की एक्साइज़ (शराब) पॉलिसी से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों से उपजा था, जिसे बाद में विवाद के बीच रद्द कर दिया गया था। सीबीआई का आरोप था कि आप सरकार द्वारा बनाई गई इस नीति ने कम फीस और एक तय मार्जिन के जरिए कुछ खास प्राइवेट कंपनियों का पक्ष लिया, जिससे कथित तौर पर रिश्वत मिली। सीबीआई केस एलजी वीके सक्सेना की 20 जुलाई, 2022 को की गई शिकायत पर दर्ज किया गया था।
आरोप था कि नीति बनाते हुए आप नेताओं, जिनमें सिसोदिया और केजरीवाल शामिल हैं, और दूसरे अनजान और बिना नाम वाले प्राइवेट लोगों/इकाइयों ने एक आपराधिक साजिश रची। आरोप के मुताबिक, इस साजिश में नीति में ‘जानबूझकर’ कमियां छोड़ी गईं या बनाई गईं। कहा गया कि ये कमियां टेंडर प्रोसेस के बाद कुछ शराब लाइसेंस वालों और साजिश करने वालों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई थीं।
पिछले कुछ सालों से भाजपा जिस तरह से शराब घोटाले के बारे में कह रही थी और हमारे ऊपर आरोप लगा रही थी तो आज कोर्ट ने सभी आरोप खारिज कर दिए और सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। हमें न्यायपालिका पर भरोसा है… सत्य की जीत हुई… AAP को खत्म करने के लिए सभी बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया था… यह पूरा फर्जी केस था… केजरीवाल भ्रष्ट नहीं है। मैंने अपने जीवन में केवल ईमानदारी कमाई है। कोर्ट ने कहा है कि केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और AAP कट्टर ईमानदार है… अच्छा काम करके सत्ता में आइए और झूठे केस करके हमें जेल में डालना प्रधानमंत्री को शोभा नहीं देता…
अरविंद केजरीवाल
‘अरविंद केजरीवाल कट्टर ईमानदार’
मीडिया के सामने अदालत के आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि चौबीस घंटे टीवी पर डिबेट दिखाई जाती थी कि केजरीवाल भ्रष्ट है, केजरीवाल भ्रष्ट नहीं है। मैंने जिंदगी भर ईमारदारी कमाई है। और आज ये साबित हो गया कि अरविंद केजरीवाल कट्टर ईमानदार है, मनीष सिसोदिया कट्टर ईमानदार है।
