बता दें कि जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में 26 फरवरी 2026 को कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय की ओर ‘लॉन्ग मार्च’ निकालने की कोशिश की। यह मार्च मुख्य रूप से वाइस चांसलर संतिश्री धुलिपुडी पंडित के कथित जातिवादी बयानों के खिलाफ था, जिन्होंने हाल ही में एक पॉडकास्ट में UGC की इक्विटी रेगुलेशंस को लेकर ‘परमानेंट विक्टिमहुड’ वाली बात कही थी।

ड्यूटी मजिस्ट्रेट रवि छात्रों की उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें मजिस्ट्रेटी अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी। मजिस्ट्रेटी अदालत के आदेश के तहत उनके दस्तावेजों और जमानत बॉण्ड के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
अदालत ने कहा, ‘‘उक्त निर्णय अंतरिम जमानत दिए जाने के बाद जेल अधिकारियों और पुलिस द्वारा जमानती बॉण्ड के सत्यापन से संबंधित था, लेकिन इसके पीछे का मूल संवैधानिक सिद्धांत स्पष्ट है कि प्रक्रियागत औपचारिकताएं इतनी लंबी नहीं होनी चाहिए कि जमानत का न्यायिक आदेश ही निष्प्रभावी हो जाए।’’
अदालत ने अनुच्छेद 21 का हवाला दिया
- अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार ऐसी अनावश्यक और असंगत हिरासत को स्वीकार नहीं करता, जब किसी विचाराधीन आरोपी को न्यायिक रूप से जमानत का हकदार पाया जा चुका हो, लेकिन फिर भी उसे केवल इसलिए बंद रखा गया हो, क्योंकि सत्यापन की प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी हो रही है।
- मजिस्ट्रेट ने कहा कि कानून ने लगातार माना है कि जमानत का उद्देश्य मुकदमे के दौरान आरोपी की मौजूदगी सुनिश्चित करना है, न कि अग्रिम दंड देना।
- अदालत ने यह भी कहा कि यदि लगातार कारावास को बिना किसी समय-सीमा या वैकल्पिक सुरक्षा उपायों के बाहरी स्थान के सत्यापन के आधार पर तय होने दिया गया, तो बाहर रहने वाले छात्रों और विचाराधीन आरोपियों के लिए जमानत का आदेश व्यावहारिक रूप से निष्प्रभावी हो सकता है।
अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने कहा, ‘‘यह अदालत मानती है कि अभियुक्तों को जमानत/जमानती बॉण्ड के सत्यापन के लंबित रहते हुए भी न्यायिक हिरासत से रिहा करने की अनुमति देकर न्याय के उद्देश्य पूरे होंगे, लेकिन अभियोजन द्वारा उठाई गई चिंताओं को दूर करने के लिए सख्त और सावधानीपूर्वक शर्तें तय करके ऐसा किया जा सकता है।’’
जांच अधिकारी (आईओ) ने प्रदर्शनकारियों की रिहाई का विरोध करते हुए अदालत में कहा कि मुकदमे के दौरान उनकी मौजूदगी सुनिश्चित करने और उन्हें फरार होने से रोकने के लिए स्थायी पतों और जमानतदारों का सत्यापन जरूरी है, खासकर इसलिए कि कुछ आरोपियों ने शुरुआत में सही विवरण नहीं दिया था।
14 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया था
जेएनयू में हुए प्रदर्शन के सिलसिले में 14 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया था। यह मार्च विश्वविद्यालय कुलपति द्वारा हाल ही में एक पॉडकास्ट में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) मानदंडों के क्रियान्वयन, जेएनयू छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) के पदाधिकारियों के निलंबन और प्रस्तावित रोहित वेमुला अधिनियम पर की गई टिप्पणियों के विरोध में जारी प्रदर्शनों का हिस्सा था।
