लुटियंस दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों और बंदरों को खाना खिलाने वालों पर NDMC ने कार्रवाई तेज कर दी है। तीन महीनों में 80 लोगों के चालान काटे गए हैं, यह कदम स्वास्थ्य और स्वच्छता नियमों के तहत उठाया गया है।

यह कार्रवाई स्वास्थ्य जोखिमों और स्वच्छता को लेकर विभिन्न अदालती आदेशों के अनुपालन में की जा रही है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कबूतरों को दाना डालने और सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर खाना खिलाने पर रोक लगाते हुए इनके लिए निर्धारित ‘फीडिंग पॉइंट्स’ बनाने के निर्देश दिए थे।
क्या कहा NDMC अफसरों ने
NDMC अफसरों ने बताया कि बंदरों की समस्या से निपटने के लिए पिछले कुछ महीनों में 2000 से अधिक बंदरों को पकड़कर असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में छोड़ा गया। कुत्तों के लिए लुटियंस जोन में 100 फीडिंग पॉइंट्स बनाए गए हैं, जबकि एमसीडी ने भी 835 स्थानों की पहचान की है। हालांकि, कई इलाकों में अभी फीडिंग पॉइंट्स बनना बाकी है। प्रशासन का उद्देश्य फीडिंग पॉइंट्स से सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली गंदगी और बीमारियों के खतरे को कम करना है।
सांस से जुड़ी बीमारियों के लिए क्यों है खतरा ?
कबूतरों की सूखी बीट हवा के जरिए सांस के साथ शरीर में जाकर फेफड़ों में सूजन और हिस्टोप्लासमोसिस जैसे गंभीर संक्रमण पैदा करती है। इसके चलते दिल्ली की लोकल बॉडीज अब दाना डालने वालों पर एक्शन ले रही हैं। वहीं, डॉग बाइट के बढ़ते केस के कारण फीडिंग पॉइंट्स बनाना अनिवार्य है, लेकिन एनडीएमसी को छोड़कर अन्य निकाय इस दिशा में काफी पीछे हैं।

