दिल्ली हाई कोर्ट ने यमुना सूर घाट पर पार्किंग समेत सभी कमर्शियल और धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि यह इलाका यमुना के संवेदनशील फ्लडप्लेन जोन में आता है और यहां पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती।

कोर्ट ने कहा- यह जमीन यमुना के ‘जोन-ओ’ में आती है
ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि DDA ने पाया कि MCD ने गलती से 3,780 वर्ग मीटर जमीन आवंटित कर दी थी, जो कि उन्हें असल में ट्रांसफर की गई 2,508 वर्ग मीटर जमीन से कहीं ज्यादा थी। 30 अप्रैल को पारित आदेश में कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि यह जमीन यमुना के बाढ़ वाले इलाकों के ‘जोन-ओ’ के तहत आती है और इसका इस्तेमाल कमर्शियल कामों के लिए नहीं किया जा सकता।
आदेश में अहम निर्देश…
हर्जाने के लिए सिविल मुकदमा: कोर्ट ने कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने के फैसले की वैधता पर फैसला देने से इनकार किया और कहा कि ये तथ्यों से जुड़े विवादित सवाल है। इसके बजाय याचिकाकर्ता को हर्जाने के लिए सिविल मुकदमा दायर करने की छूट दी गई।
कोई कमर्शियल इस्तेमाल नहीं
DDA को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस जमीन पर कोई भी गाड़ी पार्क न की जाए, फिर चाहे कोई शुभ अवसर हो या लोगों की सुविधा का मामला।
वैकल्पिक व्यवस्था
अगर श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग की जरूरत पड़ती है, तो DDA को बाढ़ वाले इलाकों से दूर दूसरी जगहें मुहैया करानी होंगी, ताकि संवेदनशील पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे।
पार्किंग विवाद तक सीमित नहीं है आदेश
यह आदेश दिल्ली की अहम नदी वाले इलाकों में अतिक्रमण और कमर्शियलाइजेशन के खिलाफ कोर्ट के सख्त रुख को और मजबूत करता है। आदेश एक पार्किंग विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि राजधानी में पर्यावरण बनाम व्यावसायिक हितों की बड़ी बहस को सामने लाता है। अदालत ने साफ संदेश दिया है कि धार्मिक सुविधा या राजस्व के नाम पर भी पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से समझौता नहीं किया जा सकता।

