उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अरावली के अवशेष और शहर के ‘ग्रीन लंग्स’ कहे जाने वाले रिज क्षेत्र को बचाने के लिए ‘रिज प्रबंधन बोर्ड’ के पुनर्गठन को मंजूरी दी है।

क्या है इसके पीछे उद्देश्य
लोक निवास के अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में उठाए गए इस कदम का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के ‘ग्रीन लंग्स’ कहे जाने वाले रिज क्षेत्र को बचाना है। यह रिज क्षेत्र अरावली पर्वतमाला के प्राचीन अवशेषों का प्रतिनिधित्व करता है, जो शहर के हरित आवरण (ग्रीन कवर) को बनाए रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
DDA के पास है इसका स्वामित्व
यह पुनर्गठित बोर्ड एक एकीकृत, बहु-एजेंसी नियामक निकाय के रूप में कार्य करेगा, जो प्रशासनिक बाधाओं को दूर कर जमीनी स्तर पर रिज के शासन-प्रशासन को सुव्यवस्थित करेगा। वर्तमान में इस क्षेत्र का स्वामित्व दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के पास है, रखरखाव वन विभाग करता है, और सुरक्षा की जिम्मेदारी एमसीडी,एनडीएमसी व दिल्ली पुलिस जैसी विभिन्न एजेंसियों पर है। इन सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने और पर्यावरण की सख्त निगरानी के लिए ही इस अंतर-एजेंसी मंच का गठन किया गया है।
दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव होंगे बोर्ड के अध्यक्ष
प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को इस बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है। उनके साथ DDA के उपाध्यक्ष, पर्यावरण मंत्रालय के वन महानिरीक्षक और MCD-NDMC के प्रमुख मुख्य सदस्यों के रूप में शामिल होंगे।
इन लोगों को भी मिली जिम्मेदारी
इसके अलावा, तकनीकी और नियामक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए CPWD के महानिदेशक और दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर को जिम्मेदारी दी गई है, जबकि प्रधान मुख्य वन संरक्षक को सदस्य-सचिव नियुक्त किया गया है। आपातकालीन स्थितियों से तुरंत निपटने के लिए इसके अधीन एक समानांतर ‘स्थायी समिति’ भी काम करेगी।

