जंतर मंतर पर 23 दिनों की भूख हड़ताल के बाद आइसा नेता नेहा बोरा ने अपने चर्चित भाषण में दिल्ली पुलिस पर बर्बरता और महिला प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के गंभीर आरोप लगाए।

लोगों के टेंट पर दागे आंसू गैस के गोले
नेहा ने कहा कि जब प्रदर्शनकारी संसद मार्च के लिए निकले थे, तब वे शांतिपूर्वक बैठे हुए थे। उनका आरोप था कि भूख हड़ताल के कारण कई छात्र चलने की स्थिति में भी नहीं थे, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने भूख हड़ताल पर बैठे लोगों के टेंट की ओर आंसू गैस के गोले दागे। उन्होंने कहा कि छात्रों के शरीर पर पड़े निशान बताएंगे कि हिंसा क्या होती है। संसद तक अपनी मांगें लेकर पहुंचे तो हमारे सिर फोड़ दिए गए, इसे याद रखा जाएगा।
दिल्ली पुलिस पर लगाया आरोप
अपने संबोधन में नेहा ने दिल्ली पुलिस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि डिक्शनरी में जब हिंसा लिखा जाएगा तो दिल्ली पुलिस का नाम सबसे पहले लिखा जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया और कई छात्रों के सिर फूट गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महिला प्रदर्शनकारियों के निजी अंगों पर पुलिसकर्मियों ने बैटन से वार किए।
आंदोलनकारियों के शरीर पर लगी चोट देंगी गवाही
नेहा ने कहा कि आंदोलनकारियों के शरीर पर लगी चोटें इस पूरे घटनाक्रम की गवाह बनेंगी। उन्होंने कहा कि हमारे इस आंदोलन के बाद जितनी जान बाकी छोड़ी है, वह गवाही देगी। हमारी चोटें हिंसा की गवाही देंगी। पांच लाख छात्रों का यह साहस याद रखा जाएगा।
सावित्रीबाई फुले का किया जिक्र
उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग शहरों से आए छात्र-छात्राओं ने लाठीचार्ज के दौरान एक-दूसरे का सहारा दिया ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए शिक्षा को बचाया जा सके। अपने भाषण के अंत में उन्होंने सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख का जिक्र करते हुए कहा कि उनके संघर्ष से आज के छात्र प्रेरणा लेते हैं।
लोगों ने जताया समर्थन
करीब 23 दिन की भूख हड़ताल के बाद लौटी नेहा के इस भाषण ने जंतर मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों में नया उत्साह भर दिया। मंच के सामने मौजूद भीड़ ने उनके संबोधन के दौरान लगातार नारे लगाए और समर्थन जताया।

