दिल्ली क्लीन एयर प्रोग्राम के पहले चरण में वर्ल्ड बैंक 150 मिलियन डॉलर की मदद देगा। पांच साल की योजना में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, करीब 1000 जगहों पर चार्जिंग ढांचा बनाने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई का प्रस्ताव है। रिपोर्ट में कम आय वाले वाहन चालकों की आजीविका और निर्माण स्थलों की सुरक्षा पर भी चिंता जताई गई है।

DPCC ने ड्राफ्ट पर जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। वर्ल्ड बैंक की पर्यावरण एवं सामाजिक प्रणाली आकलन रिपोर्ट में कार्यक्रम के समग्र पर्यावरणीय और सामाजिक जोखिम को गंभीर श्रेणी में रखा है।
- पांच साल के क्लीन एयर प्रोग्राम का ड्राफ्ट जारी किया गया
- 150 मिलियन डॉलर वर्ल्ड बैंक देगा, ईवी को बढ़ावा देने और 1000 जगहों पर चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने की योजना
पुरानी गाड़ी वालों की आजीविका पर असर
पुरानी और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले गाड़ियों पर कार्रवाई से ऑटो-रिक्शा, टैक्सी, डिलिवरी और मालवाहक छोटी गाड़ियां चलाने वाले कम आय वर्ग के लोगों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। गाड़ी बदलने की लागत और ईवी सब्सिडी तक समान पहुंच भी चुनौती है। रिपोर्ट में ईवी नीति के प्रभाव का सालाना आकलन, जरूरतमंदों को लक्षित सहायता और कार्रवाई से पहले पर्याप्त सूचना देने की सिफारिश की गई है। जांच और शिकायत या अपील की सुलभ व्यवस्था पर भी जोर है।
दो-तिहाई प्रदूषण बाहरी स्रोतों से
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के पीएम 2.5 प्रदूषण का करीब दो-तिहाई हिस्सा शहर के बाहर के स्रोतों से आता है। स्थानीय स्रोतों में सड़क और निर्माण की धूल की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत, परिवहन की 19 प्रतिशत, नगर निगम के कचरे की सात प्रतिशत और उद्योगों की 6 प्रतिशत है।
निर्माण स्थलों पर सुरक्षा संबंधी चिंताएं
आकलन में एक निर्माणाधीन बस डिपो में सुरक्षा उपकरणों के असंगत इस्तेमाल, निर्माण स्थल पर बच्चों की मौजूदगी और श्रमिक परिवारों के वही रहने जैसी स्थितियां सामने आई। रिपोर्ट में ठेकेदारों की निगरानी और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के प्रावधान अनुबंधों में शामिल करने की सिफारिश की गई है।
निगरानी के लिए बनेगी विशेष इकाई
कार्यक्रम की निगरानी के लिए पर्यावरण विभाग के तहत प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट (PMU) बनाई जाएगी। रिपोर्ट में शिकायतें और घटनाओं की निगरानी, जमीन सौंपने से पहले अतिक्रमण और प्रदूषण की जांच और निर्माण से प्रभावित रेहड़ी-पटरी वालों की सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने की भी सिफारिश की गई है।
हवा बिगाड़ने में गाड़ियां रहीं आगे
राजधानी में अभी प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह ट्रांसपोर्ट सेक्टर है। IITM पुणे के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) के आंकड़ों के मुताबिक, 14 अक्टूबर को दिल्ली के प्रदूषण में ट्रांसपोर्ट सेक्टर की हिस्सेदारी 15.15 प्रतिशत रही। वहीं, गौतमबुद्ध नगर, फरीदाबाद, गाजियाबाद और बुलंदशहर से भी प्रदूषण पहुंच रहा है। पराली जलाना शुरू हो गया है, लेकिन अभी दिल्ली के प्रदूषण में इसकी हिस्सेदारी करीब 1.5% है। IITM पुणे का DSS दिल्ली में प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों की हिस्सेदारी के साथ एनसीआर के शहरों से आने वाले प्रदूषण का भी आकलन करता है।
