नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली वेटलैंड अथॉरिटी से अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 के ब्रिज पर सवाल किया है। यह ब्रिज एक वेटलैंड पर बना है। ट्रिब्यूनल ने पर्यावरण मंत्रालय से भी जवाब मांगा है।

NGT अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अगुवाई वाली बेंच ने वेटलैंड अथॉरिटी ऑफ दिल्ली, एमओईएफ-सीसी और NHAI को छह हफ्तों के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
रिपोर्ट में हुआ था खुलासा
ट्रिब्यूनल साउथ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट में एक तालाब पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा हाईवे ब्रिज के निर्माण से जुड़े मुद्दे पर विचार कर रहा है। यह मुद्दा एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर सामने आया था। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि तालाब उन 1,000 से ज्यादा जलाशयों की सूची में शामिल था, जिन्हें संरक्षित किया जाना है।
दलील में DDA ने क्या कहा
डीडीए ने अपनी दलील में कहा कि उसने 2023 में जलाशय समेत जमीन NHAI को सौंप दी थी। इसके बाद इस मामले में उसकी कोई भूमिका नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि जमीन पर जल निकाय की मौजूदगी की जानकारी NHAI को पहले से थी। ट्रिब्यूनल ने कहा कि इससे साफ है कि NHAI ने जलाशय के भीतर ग्रेड सेपरेटर/फ्लाईओवर के आठ पिलर बनाए हैं। इनका कुल एरिया 20.36 वर्ग मीटर है, इससे जलाशय का एरिया 0.23% तक घट गया है। वेटलैंड से जुड़े नियमों पर गौर करते हुए ट्रिब्यूनल ने पाया कि नियम 4(2) के खंड (i) के अनुसार, किसी भी तरह के अतिक्रमण सहित नॉन-वेटलैंड इस्तेमालों के लिए कन्वर्जन की इजाजत नहीं है।
बताना होगा, क्या कदम उठाए
NGT ने 22 अगस्त के आदेश में कहा कि स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी के वकील यह स्पष्ट नहीं कर सके कि संबंधित वेटलैंड को किस तरह की सुरक्षा मिली है। इसलिए अथॉरिटी को निर्देश दिया गया है कि वह बताए कि क्या यह वेटलैंड अधिसूचित है। अगर हां, तो इसे किस तरह की सुरक्षा प्राप्त है, इसके लिए अथॉरिटी ने अब तक क्या कदम उठाए हैं और यदि यह सिर्फ एक सूचीबद्ध जल निकाय है, तो क्या इसकी कोई यूनिक आईडी (यूआईडी) संख्या है। NHAI की ओर से पेश वकील ने यह पता लगाने के लिए समय मांगा कि क्या एमओईएफ-सीसी को यह बताया गया था कि परियोजना के निर्माण में खंभों का निर्माण वेटलैंड पर किया जाना है।