दिल्ली की अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया है। सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़की थी। ताहिर हुसैन पर हिंसा भड़काने का आरोप था।
नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया है। ताहिर हुसैन पर दंगा भड़काने का आरोप लगाया गया था, जिसे अदालत ने सही माना है और उन्हें दोषी करार दिया है। हालांकि, कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने उन्हें अन्य आरोपों से बरी कर दिया।
अदालत ने इस मामले में अन्य आरोपियों मोहम्मद शादाब, शाह आलम, रियासत अली, गुलफाम, मोहम्मद रिहान, अरशद कय्यूम और इरशाद अहमद को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
दंगा, आगजनी और आपराधिक साजिश के थे आरोप
इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148 और 149 के तहत दंगा करने, धारा 427 के तहत संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, धारा 436 के तहत आगजनी और धारा 120B के तहत आपराधिक साजिश रचने के आरोपों में FIR दर्ज की गई थी।
अंकित शर्मा हत्याकांड में भी दोषी हैं ताहिर हुसैन
ताहिर हुसैन को दूसरी बार किसी मामले में दोषी ठहराया गया है। इससे पहले अदालत ने 2020 के दंगों के दौरान IB कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में उन्हें दोषी ठहराया था। उस मामले में ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
दंगों के दौरान हुई थी आईबी अधिकारी की हत्या
आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या 2020 के नॉर्थ ईस्ट दिल्ली दंगों के दौरान दयालपुर इलाके में हुई थी। उनका शव चांदबाग इलाके में एक नाले से बरामद किया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि अंकित के शरीर पर 40 से ज्यादा घाव थे। इस मामले में ताहिर हुसैन समेत 5 लोगों को कड़कड़डूमा कोर्ट ने 31 जुलाई को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए), 2019 और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान यह हिंसा भड़की थी। दंगों में 53 लोगों की जान चली गई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। कार्यकर्ता खालिद सैफी और आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत कई अन्य लोगों पर भी कथित व्यापक साजिश में शामिल होने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस का विशेष प्रकोष्ठ कर रहा रहा था।
लेखक के बारे मेंअभिषेक पाण्डेयअभिषेक पाण्डेय नवभारत टाइम्स में डिजिटल में पत्रकार हैं। वे जुलाई- 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। वह वर्तमान में नेशनल और दिल्ली डेस्क से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। पत्रकारिता में बतौर रिपोर्टर और डेस्क पर काम करने का 4 वर्षों का अनुभव है। नवभारत टाइम्स में जुड़ने से पहले वह दैनिक जागरण में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे। अभिषेक ने 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव 2024, महाकुंभ 2025 को काफी करीब से कवर किया है। अभी वह राष्ट्रीय स्तर पर हो रही सियासी उथल-पुथल, सामाजिक परिवर्तन और क्राइम से जुड़ी खबरों पर बारीकी से नजर रखते हैं।
विशेषज्ञता
उत्तर भारत के राज्यों की सियासी व आपराधिक घटनाक्रम पर अच्छी पकड़, किताबों के जरिए इतिहास को वर्तमान के पन्नों में खंगालने की कोशिश।
पत्रकारिता अनुभव
रामा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद अभिषेक पाण्डेय ने दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पत्रकारिता का शुरुआती ज्ञान लिया। इसके बाद उन्होंने कई संस्थानों के लिए फ्रीलांसिग की। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों के लिए जारी होने वाली धनराशि में घोटाले का खुलासा, सरकारी राशन वितरकों द्वारा ‘राशन चोरी’ का भंड़ाफोड़ किया, साथ ही किसान आंदोलन की ग्राउंड रिपोर्टिंग की। इसके बाद साल 2022 में दैनिक जागरण के डिजिटल विंग में बतौर सब एडिटर के पद पर अपने करियर की औपचारिक शुरुआत की। यहां उन्होंने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की डेस्क पर अपनी पकड़ मजबूत की। बेहतरीन लेखनी और कार्य के प्रति समर्पण को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने उन्हें 2024 में वरिष्ठ उप संपादक के पद पर प्रमोट किया। दैनिक जागरण में रहते हुए उन्होंने, खबरों का संपादन, एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया। इसके बाद अभिषेक पाण्डेय ने जुलाई 2025 में नवभारत टाइम्स के साथ अपनी पारी की शुरुआत की।
शिक्षा/पुरस्कार
मूल रूप से कानपुर से जुड़े अभिषेक पाण्डेय ने रामा यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है। दैनिक जागरण में उन्हें तीन बार बेस्ट परफॉर्मर ऑफ द मंथ से सम्मानित किया गया था।… और पढ़ें