दिल्ली में ट्रैफिक जाम की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। कई बार ऐसे हालात बन जाते हैं, जब घंटों तक लोगों को एक ही जगह पर फंसा रहना पड़ता है। ऐसे में पूरे 16 साल बाद दिल्ली के ITO चौराहे को जाम फ्री करने के लिए फिजिबिलिटी स्टडी शुरू की जा रही है। इसका तकनीकी आंकलन भी किया जा रहा है।
दिल्ली में ट्रैफिक जाम के कारण हालत आए दिन बिगड़ते रहते हैं
नई दिल्ली : कॉमनवेल्थ गेम्स के समय से ही ITO चौराहे को जाम फ्री करने का समाधान ढूंढा जा रहा है। इसके लिए करीब 16 साल बाद फिजिबिलिटी स्टडी शुरू हुई है। इसमें सामने आया है कि विकास मार्ग-रिंग रोड जंक्शन पर बने फ्लाइओवर से DDU रोड पर फ्लाइओवर बनाना ठीक रहेगा। इसका भी तकनीकी आकलन किया जा रहा है कि दोनों फ्लाइओवर को लूप से कनेक्ट कर दिया जाए।
अधिकारियों के मुताबिक, अब तक की स्टडी से यह अनुमान है कि विकास मार्ग से DDU रोड पर फ्लाइओवर बनाना ही बेहतर विकल्प होगा। बहादुर शाह जफर और तिलक मार्ग पर यह संभव नहीं है। क्योंकि इन पॉइंट पर रेलवे और मेट्रो लाइन हैं। ऐसे में फ्लाइओवर और अंडरपास बिल्कुल नहीं बनाया जा सकता है।
5 ट्रैफिक सिग्नल से फंसता है ट्रैफिक
ITO दिल्ली के सबसे बिजी चौराहों में से एक है। यहां आसपास 5 ट्रैफिक सिग्नल हैं, जिसके चलते ट्रैफिक काफी स्लो रहता है। पिछले साल चीफ सेक्रेटरी की मीटिंग के बाद पीडब्ल्यूडी ने ट्रैफिक पुलिस के साथ चौक का जायजा लेकर रिपोर्ट दी थी। करीब 2 करोड़ की लागत से दो महीने से यहां स्टडी चल रही है।
कॉमनवेल्थ गेम्स के समय से ही तलाशा जा रहा समाधान
दो महीने से चल रही फिजिबिलिटी स्टडी
लेखक के बारे मेंअक्षय श्रीवास्तवअक्षय श्रीवास्तव, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। मार्च 2025 में उन्होंने टाइम्स समूह का डिजिटल विंग नवभारत टाइम्स (NBT Digital) ज्वाइन किया। यहां अक्षय न्यूज टीम का हिस्सा हैं और राष्ट्रीय खबरों के साथ-साथ दिल्ली और अपराध से जुड़े समाचारों का संपादन और क्यूरेशन करते हैं। समय-समय पर वह फील्ड रिपोर्टिंग में भी उतरते हैं। अक्षय ग्राउंड पर जाकर खबरों के पीछे छिपी कहानी को निकालने में रुचि रखते हैं। अपने 13 साल के पत्रकारिता के अनुभव में अक्षय ने रिपोर्टिंग के साथ-साथ डेस्क पर भी कई जिम्मेदारियां संभाली हैं। अक्षय ने साल 2019 और 2024 की राजनीति के निर्णायक लोकसभा चुनाव भी कवर किए हैं।
करियर के दौरान अक्षय ने प्रिंट मीडिया में एक लंबी पारी खत्म कर साल 2018 में डिजिटल मीडिया में कदम रखा। यहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता का शुरुआती काम सीखा। इसके बाद वह दैनिक भास्कर के डिजिटल सेक्शन में काम करने लगे। यहां उन्होंने जीके सेक्शन की जिम्मेदारी संभाली। आज तक में कार्य के दौरान अक्षय ने कनमैलियों पर एक एक्सक्लूसिव स्टोरी की, जो चर्चा का विषय रही। नवभारत टाइम्स में वह कफ सिरप पीकर अपने बच्चे गंवाने वाले परिवारों तक पहुंचे और उनका दर्द जाना।
पत्रकारिता का अनुभव
अक्षय का पत्रकारिता करियर हिंदी अखबार दैनिक नव भारत भोपाल के साथ साल 2013 में बतौर ट्रेनी शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश से प्रकाशित राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर में 2014 से 2016 तक उप-संपादक के रूप में कार्य किया। 2016 से 2018 तक अक्षय ने दैनिक हरिभूमि समाचार पत्र में बतौर उप-संपादक काम किया। साल 2018 में दैनिक भास्कर के साथ उन्होंने डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद जनवरी 2022 में AajTak डिजिटल के साथ जुड़े और मार्च 2015 तक होम पेज पर अपनी सेवाएं दीं।
अक्षय ने एशिया के पहले पत्रकारिता विश्वविद्यालय माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से बीएससी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) और एमएससी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) की पढ़ाई की है। विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान वह कई प्रतियोगताओं में भाग लेकर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुके हैं।… और पढ़ें