जंतर-मंतर पर 23 जून के प्रदर्शन के दौरान कथित मारपीट मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट से राहत मिली है।

भारद्वाज के वकील उमेश चंद्र शर्मा ने बताया कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत की पुष्टि की। बचाव पक्ष ने कोर्ट को बताया कि अंतरिम जमानत के दौरान भारद्वाज ने लगाई गई किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया। वहीं, दूसरी तरफ से उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की जरूरत बताई गई थी। कोर्ट ने फिलहाल नियमित जमानत मंजूर कर ली है।
23 जून की घटना से जुड़ा है मामला
- मामला 23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित मारपीट से जुड़ा है।
- आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान भारद्वाज ने अनुसूचित जाति से जुड़े शिकायतकर्ता पर हमला किया था।
- बाद में मामले में एससी/एसटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई थीं। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती शिकायत में जातिसूचक टिप्पणी का जिक्र नहीं था, लेकिन बाद के बयान में यह आरोप सामने आया।
सितंबर में हुई थी गिरफ्तारी
भारद्वाज को सितंबर में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया और वह तिहाड़ जेल में रहे। 15 सितंबर को पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी।
कोर्ट ने रखी थीं कड़ी शर्तें
अंतरिम जमानत के दौरान भारद्वाज को मामले से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट, इंटरव्यू या सार्वजनिक बयान देने से रोका गया था। उन्हें शिकायतकर्ता, उसकी बेटी और गवाहों से संपर्क करने या उन्हें प्रभावित करने से भी मना किया गया था। कोर्ट ने उनके आचरण की रिपोर्ट भी मांगी थी।
अब आगे क्या होगा?
वकील उमेश चंद्र शर्मा के मुताबिक, अंतरिम जमानत की शर्तों का पालन किए जाने को नियमित जमानत मिलने में अहम माना गया। कोर्ट विस्तृत आदेश में जमानत की शर्तें बताएगा। मामले में आरोपों का अंतिम फैसला अब आगे होने वाले ट्रायल और सामने आने वाले सबूतों के आधार पर होगा।
