दिल्ली की मुख्य सड़कों पर खराब, लावारिस और जब्त की गई गाड़ियों के खतरनाक ढेर पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा, इन गाड़ियों की वजह से सड़कों पर जाम लग रहा है।

बेंच ने आदेश में यह भी कहा कि फरवरी 2024 में जारी किए गए दिशानिर्देशों के बावजूद, उन पर ठीक से अमल न होने से स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। लिहाजा, कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वह सभी थाना प्रभारियों से नियमित रूप से स्टेटस रिपोर्ट मांगें, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन ‘कारों के कब्रिस्तानों’ को आखिरकार साफ कर दिया जाए।
दिल्ली सरकार-पुलिस और एमसीडी को नोटिस
कोर्ट ने ‘जन सेवा वेलफेयर सोसायटी’ की जनहित याचिका पर दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस के साथ एमसीडी को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
एनजीओ अध्यक्ष अजय अग्रवाल के जरिए दाखिल इस याचिका में बताया गया कि टैक्स देने वालों के लिए बनी सार्वजनिक सड़कों को, उन्हीं अधिकारियों ने हमेशा के लिए कूड़ाघर बना दिया है।
याचिकाकर्ता ने क्या कहा
याचिकाकर्ता के वकील योगेश गोयल ने दलील दी कि जहां एक तरफ ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट आम नागरिकों पर पुरानी गाड़ियां पार्क करने के लिए 10,000 तक का भारी जुर्माना लगाता है तो वहीं, थाने सैकड़ों जब्त की गई ‘केस प्रॉपर्टी’ गाड़ियों को कई साल तक सार्वजनिक सड़कों पर ‘पूरी छूट’ के साथ पार्क करते हैं। सड़कों की चौड़ाई काफी कम हो गई है।
