दिवाली के त्योहार पर जब पूरा शहर खुशियां मनाता है, तब सुरक्षाकर्मी, दमकलकर्मी, स्वास्थ्यकर्मी और डिलीवरी पार्टनर्स अपने परिवारों से दूर रहकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।

न रुके जरूरी सामान की डिलिवरी का सिलसिला
ब्लिंकिट के डिलिवरी पार्टनर उस्मान दिवाली पर भी लोगों के घरों तक जरूरी सामान पहुंचाने में जुटे रहेंगे। वह पिछले ढाई साल से मयूर विहार इलाके में डिलिवरी का काम कर रहे हैं। उस्मान का कहना है कि दिवाली जैसे त्योहारों पर ऑर्डर बढ़ जाते हैं। ऐसे में काम करने पर इंसेंटिव भी मिलता है। उनके मुताबिक, कंपनी की सेवा 24 घंटे जारी रहती है। त्योहार के दिन लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने का सिलसिला चलता रहे इसके लिए दिवाली पर वह और उनके कई साथी ड्यूटी करेंगे। उन्होंने बताया कि ब्लिंकिट में डिलिवरी पार्टनर्स को अपनी सुविधा के अनुसार काम का समय चुनने की आजादी है।
किसी मरीज की जिंदगी बचाना ही सच्ची दिवाली
जग प्रवेश चंद्र अस्पताल के इमरजेंसी एचडीयू वार्ड में तैनात नर्सिंग स्टाफ संजय मीणा इस दिवाली रात आठ बजे तक ड्यूटी पर रहेंगे। बच्चों का सपना था कि परिवार के साथ गांव जाकर पटाखे चलाएंगे और त्योहार मनाएंगे, लेकिन अब वे घर पर पूजा करेंगे और संजय अस्पताल में मरीजों की सेवा करेंगे। संजय कहते हैं, परिवार से दूर रहने का दुख है, लेकिन किसी की जिंदगी बचाना ही सच्ची दिवाली है।
जरूरतमंदों के साथ बांटी दिवाली की खुशियां
कालिंदी कुंज थाने में तैनात इंस्पेक्टर रमन कुमार और हजरत निजामुद्दीन रेलवे थाने के इंस्पेक्टर शंभू नाथ ने दिवाली जरूरतमंदों के साथ मनाई। दोनों ने बेसहारा और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के बीच पहुंचकर उन्हें त्योहार की शुभकामनाएं दी, उपहार बाटे और उनके साथ समय बिताया। उनका उद्देश्य आर्थिक तंगी से जूझने वालों तक खुशियां पहुंचाना है।
वर्दी की जिम्मेदारी सबसे पहले, परिवार बाद में
जब लोग परिवार के साथ दिवाली मना रहे थे, तब लोधी कॉलोनी थाने की SI प्रियंका जुयाल और कॉन्स्टेबल ममता यादव सुरक्षा में तैनात थी। दोनों ने ‘ड्यूटी फर्स्ट’ के संकल्प के साथ त्योहार पर भी अपनी जिम्मेदारी निभाई।
दिवाली पर दूसरों के घरों में रोशनी लाते हैं
द्वारका फायर स्टेशन के स्टेशन ऑफिसर अमित कुमार ने 8 नवंबर 2017 को दिवाली के दिन फायर सर्विस जॉइन की थी। हर दिवाली वह परिवार से दूर टीम के साथ लोगों की जान-माल बचाने में जुटे रहते है। अमित कहते है कि अपनों से दूर रहने का दुख जरूर है, लेकिन किसी दूसरे परिवार को सुरक्षित बचाने की खुशी उससे कहीं बड़ी है।
