विवेक शुक्ला: सूरज देवता आग उगल रहे हैं, पर इससे बेपरवाह छोटे-छोटे बच्चे दरगाह कुतबुद्दीन बख्तियार काकी के आगे क्रिकेट खेलने में मस्त हैं। जिधर क्रिकेट खेली जा रही है, उसके ठीक पास है ज़फर महल। इसे मुगल दौर की दिल्ली में आखिरी प्रमुख इमारत माना जाता है। आज यह खंडहर है, जंगली घास से घिरा हुआ। लेकिन मुगलिया दौर के अंतिम दिनों की कहानी अभी भी बयां करता है।
अनाम धरोहरें: अकबर शाह द्वितीय ने 19वीं शताब्दी के आरंभ में इसे बनवाया था। बाद में बहादुर शाह जफर ने 1847-48 के आसपास इसका विस्तार किया। बहादुर शाह जफर यहीं दफन होना चाहते थे, लेकिन 1857 के बाद अंग्रेज सरकार उन्हें रंगून ले गई। भारत में मुगल साम्राज्य की नींव 1526 में बाबर ने रखी। इसके बाद 1857 तक मुग़लों ने दिल्ली में लाल किला , जामा मस्जिद , हुमायूं का मकबरा जैसी भव्य इमारतें बनवाईं। इनके अलावा कई छोटे-बड़े बाग, स्मारक और मस्जिदें भी बनीं।
आधी दुनिया का बाग: दरियागंज में स्थित पर्दा बाग मुगल काल की अनोखी विरासत है। शाहजहां की बड़ी बेटी जहांआरा बेगम ने दिल्ली में तीन ज़नाना बाग बनवाए थे- चांदनी चौक, जामा मस्जिद के पास और दरियागंज में। ये बाग सिर्फ आधी दुनिया के लिए थे। पुरुषों का यहां प्रवेश वर्जित था। अंदर केवल माली और पांच-सात साल से कम उम्र के बच्चे ही जा सकते थे।
क्रांति का गवाह: कश्मीरी गेट के पास स्थित कुदसिया बाग को मुहम्मद शाह रंगीला की तीसरी पत्नी कुदसिया बेगम ने बनवाया था। एक समय यहां बारादरी, शाही मस्जिद, अस्तबल और फव्वारे थे। 1857 की क्रांति के दौरान इस बाग को भारी नुकसान पहुंचा। आज भी बाग आबाद है।
बाग में बीसीसीआई: शाहजहां की दूसरी बेटी रोशनआरा ने 1650 में रोशनआरा बाग बनवाया था। शक्ति नगर में स्थित इस बाग में हजारों पेड़-पौधे हैं, जिनमें कुछ जापान से आयातित भी हैं। बाग के अंदर एक खूबसूरत झील भी है। रोशनआरा बेगम यहीं दफन हैं। बाग के अंदर रोशनआरा क्लब भी है। यहीं 1927 में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की स्थापना हुई थी।
जामा मस्जिद की प्रतिकृति: दरियागंज में जामा मस्जिद की एक सुंदर प्रतिकृति भी है। इसका नाम है ज़ीनत-उल-मसाजिद (जिसे घटा मस्जिद भी कहा जाता है)। इसे औरंगजेब की दूसरी बेटी ज़ीनत-उन-निसा बेगम ने 1700-1710 के आसपास बनवाया था। यहां आकर लगता है कि ज़ीनत-उन-निसा बेगम ने अपने दादा शाहजहां की जामा मस्जिद को बार-बार देखा होगा और प्रभावित होकर उसी शैली में यह मस्जिद बनवाई होगी। अगली बार दिल्ली घूमें तो इन अनाम बागों और स्मारकों को भी ज़रूर देखें।
लेखक के बारे मेंअभिषेक पाण्डेयअभिषेक पाण्डेय नवभारत टाइम्स में डिजिटल में पत्रकार हैं। वे जुलाई- 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। वह वर्तमान में नेशनल और दिल्ली डेस्क से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। पत्रकारिता में बतौर रिपोर्टर और डेस्क पर काम करने का 4 वर्षों का अनुभव है। नवभारत टाइम्स में जुड़ने से पहले वह दैनिक जागरण में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे। अभिषेक ने 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव 2024, महाकुंभ 2025 को काफी करीब से कवर किया है। अभी वह राष्ट्रीय स्तर पर हो रही सियासी उथल-पुथल, सामाजिक परिवर्तन और क्राइम से जुड़ी खबरों पर बारीकी से नजर रखते हैं।
विशेषज्ञता
उत्तर भारत के राज्यों की सियासी व आपराधिक घटनाक्रम पर अच्छी पकड़, किताबों के जरिए इतिहास को वर्तमान के पन्नों में खंगालने की कोशिश।
पत्रकारिता अनुभव
रामा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद अभिषेक पाण्डेय ने दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पत्रकारिता का शुरुआती ज्ञान लिया। इसके बाद उन्होंने कई संस्थानों के लिए फ्रीलांसिग की। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों के लिए जारी होने वाली धनराशि में घोटाले का खुलासा, सरकारी राशन वितरकों द्वारा ‘राशन चोरी’ का भंड़ाफोड़ किया, साथ ही किसान आंदोलन की ग्राउंड रिपोर्टिंग की। इसके बाद साल 2022 में दैनिक जागरण के डिजिटल विंग में बतौर सब एडिटर के पद पर अपने करियर की औपचारिक शुरुआत की। यहां उन्होंने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की डेस्क पर अपनी पकड़ मजबूत की। बेहतरीन लेखनी और कार्य के प्रति समर्पण को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने उन्हें 2024 में वरिष्ठ उप संपादक के पद पर प्रमोट किया। दैनिक जागरण में रहते हुए उन्होंने, खबरों का संपादन, एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया। इसके बाद अभिषेक पाण्डेय ने जुलाई 2025 में नवभारत टाइम्स के साथ अपनी पारी की शुरुआत की।
शिक्षा/पुरस्कार
मूल रूप से कानपुर से जुड़े अभिषेक पाण्डेय ने रामा यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है। दैनिक जागरण में उन्हें तीन बार बेस्ट परफॉर्मर ऑफ द मंथ से सम्मानित किया गया था।… और पढ़ें