दिल्ली की नई ईवी नीति के तहत 2028 से पेट्रोल बाइक रजिस्ट्रेशन बंद कर केवल इलेक्ट्रिक बाइक की अनुमति हो सकती है, जिससे 65% तक वाहन ईवी होंगे। सरकार का लक्ष्य प्रदूषण घटाना और लागत कम करना है। फिलहाल प्रस्ताव पर सुझाव मांगे गए हैं।

सरकार के मुताबिक दिल्ली में कुल प्रदूषण में 25-30 प्रतिशत की भागीदारी सिर्फ गाड़ियों की है। वहीं सिर्फ टूवीलर्स की प्रदूषण में भागीदारी 15-18 फीसदी आंकी जाती है। इसलिए सरकार ने ईवी नीति में जनवरी 2028 से नई पेट्रोल बाइक के पंजीकरण पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने का फैसला किया हैं। हालांकि, उससे पहले रजिस्टर्ड टूवीलर दिल्ली में चलते रहेंगे।
- 87.62 लाख से अधिक गाड़ियां दिल्ली में मौजूद है
- 59.28 लाख से अधिक टूवीलर है
- 4.70 लाख इलेक्ट्रिक वीकल दिल्ली में है
- 10.11 लाख टूवीलर बीते दो साल में रजिस्टर्ड हुए है
- 6.75 इसमें इलेक्ट्रिक टूवीलर है
‘प्रदूषण में आएगी कमी’
वहीं, परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह का कहना है कि इलेक्ट्रिक टूवीलर आने से दो फायदे है। उसे चलाने वालों की लागत कम होगी, साथ ही प्रदूषण में भी कमी आएगी।
दिल्ली में कितनी गाड़ियां हैं?
परिवहन विभाग के आंकड़ों की मानें तो दिल्ली में मार्च 2026 तक कुल $7.62 लाख से अधिक गाड़ियां रजिस्टर्ड है, जिसमें अकेले 67.65 फीसदी यानी 59.30 लाख से अधिक टूवीलर हैं। इसमें ईवी टूवीलर की संख्या बेहद कम है।
2024-25 में दिल्ली में कुल 4.55 लाख टूवीलर रजिस्टर्ड हुए हैं, जिसमें महज 27,243 इलेक्ट्रिक बाइक हैं। इसी तरह 2025-26 में कुल 5.14 लाख टूवीलर रजिस्टर्ड हुए, लेकिन उसमें सिर्फ 5 फीसदी यानी 41,042 ई-बाइक शामिल है। यानी दो साल में 10 लाख से अधिक रजिस्टर्ड टूवीलर में सिर्फ 6.75 फीसदी ही ई-बाइक है।
नई EV नीति के लिए मांगे गए हैं लोगों से सुझाव
दिल्ली में वर्तमान में कुल इलेक्ट्रिक गाड़ियो की संख्या 4.71 लाख के करीब है। इसमे ई-बाइक, ई-ऑटो, बस, कार और ई-रिक्शा भी शामिल है। सरकार ने अब नई ईवी नीति लेकर आई है, जिसे सार्वजनिक करके 10 मई तक लोगों से सुझाव मांगे है। उसमें ईवी खरीदने पर सब्सिडी देने के साथ-साथ चरणबद्ध तरीके से ई-आटो, ई-बाइक के साथ स्कूल की ई-बसों को अनिवार्य करने का प्रावधान भी किया है।
