एम्स ने रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए एक ही बार में लिम्फ नोड की जटिल सर्जरी पूरी कर नई उपलब्धि हासिल की है। इस तकनीक से मरीजों की रिकवरी तेज हुई है और जटिलताओं का खतरा भी कम हुआ है।

एम्स के ऑन्कोलॉजी सर्जन डॉक्टर सुनील कुमार ने बताया कि लिंग (Penis) और योनी (Vulva) कैंसर में ग्रोइन के लिम्फ नोड निकालना पड़ता है। इसमें दोनों पैर और पेट से नोड निकालनी पड़ती है। इस सर्जरी के लिए रोबॉट का इस्तेमाल लंबे समय से हो रहा है, लेकिन दिक्कत यह थी कि पहले एक पैर के लिए रोबॉट लगाना पड़ता था। इसमें 5 की-होल यानी 8 एमएम का छेद करना पड़ता था। इस प्रकार दूसरे पैर में और फिर पेट में भी रोबॉट सेट करना पड़ता था। जिससे मरीजों को परेशानी होती थी और बार-बार रोबॉट सेट करना पड़ता था।
जोखिम कम और रिकवरी तेज
सर्जरी की खासियत और नई पहल के बारे में कैंसर सर्जन डॉक्टर बाबुल बंसल ने बताया कि तीन अलग-अलग बार रोबॉट के इस्तेमाल से कॉम्प्लिकेशन का खतरा ज्यादा रहता था। पहले एक पैर की सर्जरी, फिर दूसरी और फिर पेट की। हमने सोचा कि क्यों न एक बार में सर्जरी की जाए और इसके लिए हमने पेट में एक बार रोबॉट लगाया और सिर्फ 5 छेद के जरिए रोबॉट सेट किया और एक बार में दोनों पैर यानी थाई के नीचे और पेट से लिम्फ नोड निकाल लिए। इसमें लिम्फ नोड भी अच्छी तरह से निकला। अब तक हम इस तकनीक से 6 मरीजों की सर्जरी कर चुके हैं। रिकवरी भी फास्ट हुई है। डॉक्टर बंसल ने दावा किया कि ग्लोबली रोबॉट का इस प्रकार इस्तेमाल कर पहली बार सर्जरी की गई है।
