लुटियंस दिल्ली की ऐतिहासिक ‘गोल मार्केट’ को म्यूजियम और आर्ट गैलरी में बदलने का प्रोजेक्ट प्रशासनिक और कानूनी अड़चनों के कारण 20 साल से अधूरा है,

बार बार बदली NDMC प्रोजेक्ट की डेडलाइन
प्रशासनिक मंजूरियों में देरी, कानूनी लड़ाइयों और बार-बार बदलती डेडलाइन के कारण यह प्रोजेक्ट लगातार लेट होता गया है, जिससे अब इसकी नई समय-सीमा सितंबर 2026 तय की गई है। NDMC के रिकॉर्ड के अनुसार पहली प्रशासनिक मंजूरी सितंबर 2006 में मिली थी, जिसके लिए 6.3 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी दी गई थी।
बिल्डिंग को म्यूजियम बनाने का था प्रोजेक्ट
NDMC ने यह प्रोजेक्ट जून 2009 में 7.7 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान पर दिया गया था, जिसकी समय-सीमा अगस्त 2010 थी। योजना यह थी कि गोल आकार की इस ग्रेड-II हेरिटेज बिल्डिंग को एक म्यूजियम में बदला जाए, जिसमें दिल्ली का इतिहास, खासकर NDMC की कहानी और नई दिल्ली के बनने की कहानी दिखाई जाए।
बाजार में घटी दुकानों की संख्या
आपको बता दें किसाल 2007 में इस इमारत को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) और यहां के व्यापारियों के बीच करीब छह साल तक कानूनी जंग चली। साल 2013 में कोर्ट का फैसला NDMC के पक्ष में आया और 2016 तक दुकानदारों ने जगह खाली की। इस लंबी खिंचातान और मौजूदा निर्माण कार्य के चलते कभी गुलजार रहने वाले इस बाजार के व्यापारियों की आजीविका पर गहरा असर पड़ा है, जिससे यहां चलने वाली दुकानों की संख्या 76 से घटकर अब सिर्फ 25 रह गई है।
मामले में क्या बोले NDMC उपाध्यक्ष
जून 2022 में दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना के दखल के बाद इस ठप पड़े प्रोजेक्ट ने रफ्तार पकड़ी और अक्टूबर 2023 में इसका काम शुरू हुआ। NDMC के उपाध्यक्ष कुलजीत चहल के अनुसार, पहले सिर्फ म्यूजियम बनना था, लेकिन बाद में इसमें आर्ट गैलरी भी जोड़ी गई, जिससे देरी हुई। फिलहाल यहां करीब 45% सिविल कार्य और सबवे की खुदाई का काम पूरा हो चुका है। अधिकारियों का दावा है कि पूरा होने के बाद यह इमारत “बेमिसाल” दिखेगी, लेकिन स्थानीय निवासियों और दुकानदारों के लिए असली चुनौती धूल, ट्रैफिक जाम और चूहों की समस्या से जूझते हुए इस आखिरी डेडलाइन के पूरा होने का इंतजार करना है।
