दिल्ली-NCR में दशहरे पर कई जगह भव्य रावण दहन होगा। दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना है। लाल किला मैदान में 110 फुट का रावण जलेगा, जबकि पीतमपुरा में 30 फुट का कॉकरोच जलाया जाएगा।

आईपी एक्सटेंशन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में होने वाले भव्य दशहरा समारोह में शामिल हो सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के इन उत्सवों में शामिल होने की संभावना को देखते हुए व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि कार्यक्रम का आयोजन सुचारू रूप से हो सके।
लवकुश रामलीला, लाल किला मैदान
राजधानी दिल्ली के लाल किला मैदान में प्रति वर्ष प्रसिद्ध लवकुश रामलीला का आयोजन किया जाता है। ऐतिहासिक लव कुश रामलीला में इस बार रावण दहन एक बेहद नाटकीय और अनूठे अंदाज में होगा। आयोजकों के मुताबिक, जैसे ही भगवान राम का बाण रावण के पुतले को लगेगा, वह हे राम कहकर चीख उठेगा। इसके बाद एक विशेष संवाद के जरिये लोगों से अपने भीतर की बुराइयों का खात्मा करने की अपील की जाएगी।
लव कुश रामलीला समिति के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने कहा कि 110 फुट ऊंचे इस भव्य रावण के पुतले में कई नए आकर्षण जोड़े गए हैं- जैसे इसके हाथ में घूमती हुई तलवार और जलती हुई प्रतीत होती आंखें। इस विशाल राक्षस राजा के पुतले की भव्यता बढ़ाने के लिए इसमें 11 अलग-अलग रंगों की 11 मालाएं पहनाई गई हैं। इसके साथ ही 100 फीट का कुंभकरण और 90 फुट का मेघनाद भी मैदान में डटे होंगे। इस भव्य समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के शामिल होने की उम्मीद है।
द्वारका श्री रामलीला
द्वारका श्री रामलीला ने परंपरा और प्रौद्योगिकी का अनूठा संगम पेश किया है। यहां 90 फुट ऊंचे रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले तो आकर्षण का केंद्र हैं ही, साथ ही इस आयोजन को पूरी तरह डिजिटल और पर्यावरण-अनुकूल बना दिया गया है। द्वारका श्री रामलीला की कोर-कमेटी के सदस्य एवं मीडिया प्रमुख भारत भूषण मालवीय ने कहा, ‘इस साल मंचन का सोशल मीडिया मंचों पर सीधा प्रसारण किया गया और आगंतुकों के लिए पहली बार एक ऐप एवं डिजिटल टिकटिंग की शुरुआत की गई है।’
पश्चिम विहार
पश्चिम विहार की इंद्रप्रस्थ रामलीला समिति ने समाज की कड़वी सच्चाइयों को उजागर करने की अपनी परंपरा को इस बार भी कायम रखा है। यहां रावण, कुंभकरण और मेघनाद के अलावा एक चौथे पुतले का दहन किया जाएगा, जिसका नाम आज का रावण रखा गया है। समिति के अध्यक्ष संदीप बिंदु ने बताया कि यह पुतला जेनेरिक दवाओं की कीमतों में हो रही भारी हेरफेर और नकली दवाओं के काले कारोबार का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज दवाइयों के दाम इतने आसमान छू रहे हैं कि आम आदमी की पहुंच से बाहर हैं, ऊपर से नकली दवाओं का जोखिम जानलेवा साबित हो रहा है।
पीतमपुरा
स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए पीतमपुरा की श्री केशव रामलीला समिति ने इस बार एक बेहद अनूठा तरीका निकाला है। यहां रावण, कुंभकरण और मेघनाद के साथ 30 फुट ऊंचे एक विशाल ‘कॉकरोच’ का पुतला भी जलाया जाएगा। समिति के अध्यक्ष अशोक गोयल ने स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक मकसद से नहीं, बल्कि ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और स्वच्छता का संदेश देने के लिए है, क्योंकि कॉकरोच गंदगी और अस्वच्छता का प्रतीक है। समिति इससे पहले आतंकवाद और नक्सलवाद के पुतले भी जला चुकी है।
नोएडा में 35 स्थानों पर होगा रावण दहन
नोएडा के सेक्टर 62, नोएडा स्टेडियम, सेक्टर 46 व सेक्टर 110 महर्षि आश्रम समेत नोएडा में 35 स्थानों पर रावण दहन किया जाएगा, जबकि करीब 200 स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन होगा। त्योहार के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए करीब 2200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा। इनमें 300 महिला पुलिसकर्मी भी शामिल रहेंगी। इसके अलावा अग्निशमन विभाग ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 26 दमकल वाहनों और करीब 250 अग्निशमन कर्मियों को मुस्तैद रखने की तैयारी की है।
बिसरख में नहीं चलेगा रावण?
ग्रेटर नोएडा के बिसरख में रावण दहन नहीं किया जाता है। मान्यता है कि यह राक्षस राजा रावण की जन्मस्थली है। महंत रामदास महाराज ने बताया कि स्थानीय धार्मिक मान्यताओं में इस गांव का एक विशेष स्थान है और यह ऋषि ब्रह्मा तथा ऋषि पुलस्त्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह रावण की जन्मस्थली है और कभी यहां ऋषि ब्रह्मा और ऋषि पुलस्त्य का आश्रम हुआ करता था। यहां साल भर रोज रावण की पूजा की जाती है। आज दशहरा है, और यहां एक ‘यज्ञ’ किया जा रहा है। मंदिर को बहुत सुंदर ढंग से सजाया गया है और रावण के लिए विशेष प्रार्थनाएं की जा रही हैं।
स्थानीय परंपरा के अनुसार, बिसरख को पहले ‘विश्वेश्वर’ के नाम से जाना जाता था, जो रावण के पिता ‘विश्रवा’ से जुड़ा नाम है। माना जाता है कि त्रेता युग में ऋषि विश्रवा का जन्म इसी गांव में हुआ था और उन्होंने यहां एक शिवलिंग स्थापित किया था। भगवान शिव के भक्त रावण ने भी संभवतः इसी स्थान पर पूजा की थी।
