दिल्ली की एक अदालत ने हत्या के मामले को लापरवाही से गाड़ी चलाने का रूप देने वाले शाहबाद डेयरी थाने के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस कमिश्नर को अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्देश दिया है।

मजिस्ट्रेट ने पुलिस कमिश्नर को दिए आदेश
ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास भारती बेनीवाल ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वे खुद व्यक्तिगत रूप से इस मामले की जांच करें। कोर्ट ने शाहबाद डेयरी पुलिस स्टेशन के जांच अधिकारी (IO), स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए हैं। साथ ही सुनवाई की अगली तारीख तक रिपोर्ट भी मांगी।
क्या था पूरा मामला
शिकायत के अनुसार, 26 जनवरी को मोनू घायल हालत में घर लौटा और बताया कि नागेंद्र नाम के व्यक्ति ने उस पर हमला किया और गाड़ी से कुचल दिया। अस्पताल ले जाते समय मोनू के भाइयों ने एक वीडियो भी बनाया था, जिसमें उसने नागेंद्र का नाम लिया था। 22 दिनों तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद 16 फरवरी को मोनू की मौत हो गई थी।
जांच अधिकारी ने डॉक्टरों से नहीं किया संपर्क
कोर्ट ने कहा कि पीड़ित के तीन हफ्ते से ज्यादा जीवित रहने के बावजूद जांच अधिकारी ने डॉक्टरों से ठीक से संपर्क नहीं किया। मोनू के ‘डाइंग डिक्लेरेशन’ (वीडियो रिकॉर्डिंग) को सबूत के तौर पर नजरअंदाज किया गया और फॉरेंसिक रिपोर्ट को भी दरकिनार कर दिया गया। कोर्ट ने साफ कहा कि यह सिर्फ प्रक्रियात्मक अनियमितता नहीं है, बल्कि एक ऐसा मौलिक दोष है जिससे महत्वपूर्ण सबूत हमेशा के लिए खो गए हैं और इसका असर पूरे मुकदमे पर पड़ेगा।
कब है मामले की अगली सुनवाई
शुरुआत में पुलिस ने इस मामले में लापरवाही से गाड़ी चलाने की मामूली धाराएं (BNS 281 और 125(a)) लगाई थीं और मौत के बाद धारा 106 जोड़ी। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब सीधे तौर पर हमले के आरोप थे, तो पुलिस ने बीएनएस (BNS) की धारा 103 (हत्या) के बजाय धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) क्यों लगाई। कोर्ट ने डीसीपी को निर्देश दिया है कि वे चोटों पर नई मेडिकल राय लें। इस मामले में राज्य की तरफ से एपीपी प्रमोद कुमार और शिकायतकर्ता की तरफ से वकील तनुज कुमार शर्मा पेश हुए। अब मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी, जिसमें अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई है।

