आवारा कुत्तों के मैनेजमेंट और फंड से जुड़ी जानकारी छुपाने पर केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने दिल्ली नगर निगम (MCD) पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया है।

सीआईसी ने एमसीडी पर लगाया फाइन
इस घोर लापरवाही के लिए सीआईसी ने जन सूचना अधिकारी (PIO) पर ₹25,000 का अधिकतम जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही, मानसिक परेशानी और लंबी कानूनी लड़ाई झेलने के लिए आरटीआई आवेदक अक्षय कुमार मल्होत्रा को ₹10,000 का मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया है।
क्या था पूरा मामला
आपका बता दें कि यह पूरा मामला दिसंबर 2022 का है, जब अक्षय कुमार मल्होत्रा ने एक आरटीआई दाखिल कर एमसीडी से आवारा कुत्तों की नसबंदी, वैक्सीनेशन, डॉग शेल्टर, पशु कल्याण संगठनों (NGO) को किए गए भुगतान और जनता से मिली शिकायतों पर हुई कार्रवाई का ब्यौरा मांगा था।
एमसीडी कमिश्नर को दिए निर्देश
इस पर सुनवाई करते हुए सीआईसी ने अब एमसीडी कमिश्नर को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे जानवरों के जन्म नियंत्रण (ABC) कार्यक्रम, एनजीओ को दिए गए फंड, कॉन्ट्रैक्ट और शिकायतों की स्टेटस रिपोर्ट को अपनी वेबसाइट पर खुद से सार्वजनिक करें। आयोग ने कहा कि यह जानकारी सार्वजनिक फंड और जन सुरक्षा से जुड़ी है, जिसे आरटीआई एक्ट की धारा 4(1)(b) के तहत पहले ही वेबसाइट पर होना चाहिए था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का किया जिक्र
केंद्रीय सूचना आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के 19 मई, 2026 के हालिया फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें शीर्ष अदालत ने एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) उपायों की बारीकी से निगरानी के लिए पुख्ता डेटा को सार्वजनिक करने की जरूरत पर जोर दिया था। सीआईसी ने माना कि अगर यह डेटा पहले से पोर्टल पर उपलब्ध होगा, तो पारदर्शिता बढ़ेगी।
सीआईसी ने जताई इस बात पर चिंता
आयोग ने सुनवाई के दौरान इस बात पर भी गंभीर चिंता जताई कि जब आवेदक ने आवारा कुत्तों से जुड़ी जानकारी मांगी, तो एमसीडी विभाग द्वारा उसकी पर्सनल डिटेल्स लीक कर दी गईं, जिसके बाद उसे ‘थर्ड पार्टी’ (तीसरे पक्ष) द्वारा डराया-धमकाया और परेशान किया गया। आयोग ने कहा कि डेटा ऑनलाइन होने से आरटीआई कार्यकर्ताओं को ऐसे उत्पीड़न से बचाया जा सकेगा।
सीधे जवाब देने की बजाया करने लगे टाल मटोल
एमसीडी के अधिकारियों ने आवेदक को सीधे जानकारी देने के बजाय टाल-मटोल की और कहा कि वह उन एनजीओ से खुद संपर्क करे जिन्होंने काम किया था। आयोग ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारी जानते थे कि एनजीओ पब्लिक अथॉरिटी नहीं हैं और वे जानकारी देने से मना कर देंगे। –

