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प्रयागराज की पावन धरा से पुण्य प्रयास: राष्ट्र रक्षा और विश्व शांति के लिए सवा लाख तंडुल शिवलिंग महायज्ञ

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Last updated: June 4, 2026 12:01 pm
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गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन त्रिवेणी संगम की अलौकिक भूमि एक बार फिर एक युगांतरकारी आध्यात्मिक क्रांति की गवाह बनने जा रही है। आगामी 11 जून 2026, बुधवार को प्रयागराज के प्रतिष्ठित तपोवन आश्रम (झूंसी) में एक ऐसा अभूतपूर्व और विराट आध्यात्मिक समागम होने जा रहा है, जिसकी गूंज न केवल देश में बल्कि पूरे विश्व में सुनाई देगी। पूज्य आचार्य हरि कृष्ण शुक्ल गुरुजी के दिव्य सान्निध्य में यहां “सवा लाख तण्डुल शिवलिंग महायज्ञ” का महाआयोजन किया जा रहा है।

“जब जुड़ेंगे आस्था के हाथ, तो जागेगी राष्ट्र चेतना और झुकेगा हर संकट”
यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान या परंपरागत कर्मकांड नहीं है, बल्कि वर्तमान वैश्विक संकटों के बीच भारत की रक्षा, सनातन शक्ति के प्रकटीकरण, राष्ट्र कल्याण, सांस्कृतिक पुनरुत्थान और वैश्विक शांति की बहाली का एक महाअभियान है। प्रयागराज के इतिहास में पहली बार हो रहा यह आयोजन इस बात का शंखनाद है कि जब-जब मानवता संकट में होगी, सनातन संस्कृति अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा से लोक-कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगी।

वैश्विक अशांति और खगोलीय संकट के बीच ‘महाकाल’ की शरण
मौजूदा समय में पूरी दुनिया जिस दौर से गुजर रही है, वह बेहद चिंताजनक है। इस समय ब्रह्मांड में तीन-तीन महीनों के लिए ‘कालसर्प योग’ का साया मंडरा रहा है। वैश्विक क्षितिज पर नजर डालें तो हर तरफ हिंसा, अहंकार, अशांति, आपसी खिंचाव और असमय मौतों का तांडव दिख रहा है। भारत भी इन विसंगतियों से अछूता नहीं है। समाज से संवेदनशीलता कम हो रही है, महंगाई का बोझ बढ़ रहा है, और प्रकृति भी 48 डिग्री सेल्सियस जैसी भीषण गर्मी, जानलेवा एक्सीडेंट्स और आपदाओं के रूप में अपना रौद्र रूप दिखा रही है। पूज्य आचार्य हरि कृष्ण शुक्ल गुरुजी कहते हैं कि “जब भौतिक प्रयास विफल होने लगते हैं, तब आध्यात्मिक चेतना ही संसार को त्राहिमाम से बचाती है। प्रयागराज की यह पवित्र भूमि अनादि काल से यज्ञों की भूमि रही है। सरस्वती के इसी पावन तट पर स्थित तपोवन आश्रम से हम महादेव की आराधना कर संपूर्ण विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने जा रहे हैं।”

अक्षत (तण्डुल) शिवलिंग: पूर्णता और अखंडता का प्रतीक
महायज्ञ के प्रणेता आचार्य हरि कृष्ण शुक्ल जी के अनुसार, तण्डुल (अक्षत) सनातन परंपरा में पूर्णता और क्षय न होने वाली ऊर्जा का प्रतीक है। इस महायज्ञ में 101 प्रकांड वैदिक विद्वानों के साथ-साथ आम जनमानस की सीधी भागीदारी होगी। सभी के सामूहिक सहयोग से एक लाख से अधिक तण्डुल (चावल) के शिवलिंगों का हस्त-निर्माण किया जाएगा। इसके बाद वेदोक्त रीति-रिवाज, दिव्य मंत्रोच्चार और भव्य रुद्राभिषेक के जरिए महादेव को प्रसन्न किया जाएगा। साथ ही राष्ट्र की अखंडता, सीमाओं की सुरक्षा और सनातन संस्कृति के संरक्षण के सामूहिक संकल्प के अलावा आधुनिकता की दौड़ में खो रही नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली जड़ों और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का भी प्रयास किया जाएगा।

इस महाआयोजन के समापन पर 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के लिए एक विशाल भंडारे (महाप्रसाद) का भी प्रबंध किया गया है।
यह आयोजन केवल आध्यात्मिक कर्म नहीं, बल्कि देश में ‘राष्ट्र चेतना’ का संचार करने के लिए किया जा रहा है। जब देश का नागरिक अपनी सांस्कृतिक जड़ों से मजबूत होगा, तभी एक सशक्त और अखंड राष्ट्र का निर्माण संभव है। 11 जून 2026 को झूंसी का तपोवन आश्रम आस्था, राष्ट्रभक्ति और अध्यात्म के एक ऐसे अनूठे संगम का केंद्र बनने जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणापुंज साबित होगा। यदि आप भी इस ऐतिहासिक और कल्याणकारी महायज्ञ के साक्षी बनना चाहते हैं, तो प्रयागराज के इस पावन तट पर आपका स्वागत है।

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