पंजाब केसरी की निदेशक किरण चोपड़ा ने युवा पत्रकारों को निर्भीक होकर पत्रकारिता करने और हमेशा सच्चाई का साथ निभाने का संदेश दिया है।
यूट्यूब चैनल शिव की मौली को दिए एक साक्षात्कार में किरण चोपड़ा ने कहा कि “यदि पंजाब केसरी का नाम लाला जगतनारायण भी रख दिया जाए तो इसमें कुछ गलत नहीं होगा।”
उन्होंने बताया कि लाला जगतनारायण ने एक पन्ने पर संदेश लिखकर उसे लोगों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया था। धीरे-धीरे एक पन्ने से दो पन्ने बने, फिर दो से चार पन्ने हुए और इसी तरह यह सफर आगे बढ़ता गया। आज पंजाब केसरी देश की जनभावनाओं की आवाज बन चुका है।
किरण चोपड़ा ने कहा कि पंजाब केसरी केवल एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि सत्य, साहस और जनसेवा की सोच का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान की नींव लोगों तक सच पहुंचाने के उद्देश्य के साथ रखी गई थी।
उन्होंने युवा पत्रकारों को संदेश देते हुए कहा, “सभी युवा पत्रकारों से मेरा यही कहना है कि वे निर्भीक बनें और सच्चाई का साथ कभी न छोड़ें।”
बता दें कि प्रख्यात मातृश्री मीडिया अवॉर्ड सबसे पहले वर्ष 1977 में लाला जगत नारायण जी द्वारा पत्रकारों को दिया गया था। पंजाब केसरी के वरिष्ठ पत्रकार रहे दिनेश शर्मा, जो मातृश्री अवॉर्ड के कन्वीनर भी थे, बताया करते थे कि इमरजेंसी के दौर में पंजाब केसरी की छपाई ट्रैक्टर चलाकर और उससे पैदा हुई बिजली की मदद से की गई थी।

